आया रे कॉक्रोच – Lyrics 2026

आया रे कॉक्रोच – Lyrics 2026
मुखड़ा
बड़े दिनों से गंध मची थी, बिना किसी संकोच,
गंध मिटाने, वक्त बदलने आया रे कॉक्रोच।
सड़ गया सिस्टम, सड़ गई सोच,
झूठ के जंगल खाने आया, आया रे कॉक्रोच।।
ना सिंहासन, ना कोई ताज,
सच की लेकर जलती आवाज,
अंधियारे को चीर के बोला —
अब बदलेगा दौर आज।।
अंतरा 1
बड़ी-बड़ी सी कीमत लेकर, बड़े-बड़े एहसान,
फिर भी भूखा बैठा देखा मैंने हिंदुस्तान।
बिना ज्ञान के, बिना पढ़े लिखे, बन बैठे सरदार,
मेहनत करने वालों का क्यों टूट रहा संसार।।
रोटी सस्ती, सपने महंगे,
कैसे जीए गरीब,
ऊपर वाले मौज उड़ाएँ,
नीचे रोए नसीब।।
सड़ गया सिस्टम, सड़ गई सोच,
झूठ के जंगल खाने आया, आया रे कॉक्रोच।।
अंतरा 2
मत भूलो ये देश सभी का, सबका है अधिकार,
मिट्टी बोले — साथ चलो तुम, मत करना व्यापार।
एक ही विनती तुमसे करते, करने दो कुछ काम,
देश के खातिर जीने वालों का भी रख लो मान।।
रोज़गार के बंद पड़े जो
दरवाज़ों को खोल,
युवा खड़ा है हाथ बढ़ाकर,
मत तोड़ो उसका मोल।।
बड़े दिनों से गंध मची थी, बिना किसी संकोच,
गंध मिटाने, वक्त बदलने आया रे कॉक्रोच।।
ब्रिज
ना डर सत्ता के पहरे से,
ना झूठे प्रचारों से,
सच की आग लिए निकला हूँ
मैं जनता के द्वारों से।।
हां मैं भी इक युवा देश का,
मेरे भी कुछ सोच,
से गले को खाने आया,
आया रे कॉक्रोच।।
अंतिम मुखड़ा
सड़ गया सिस्टम, सड़ गई सोच,
बदबू वाले राज में जागा नया कॉक्रोच।
ना बिकने वाला, ना झुकने वाला,
सच की लेकर मशाल,
देश बचाने निकला देखो
जनता का लाल।।


