बिल्ला बिल्ली को याव – निमाड़ी हास्य लोकगीत | Shivshankar Ji Kushwaha | Gitesh Kumar Bhargava

गीत विवरण (Song Information)
गीत नाम: बिल्ला बिल्ली को याव
गीत प्रकार: निमाड़ी हास्य लोकगीत
रचनाकार: शिशंकर जी कुशवाहा
गायक: गीतेश कुमार भार्गव
भाषा: निमाड़ी
शैली: लोक हास्य / व्यंग्य
प्रस्तुति: Nimadi Kalakar
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🎼 गीत के बोल
स्थायी
मन देख्यो रात म एक सपनो सख चिल्ली को – (2)
पशु पक्षि करि रया याव, बिल्ला बिल्ली को
अंतरा
डेडर क एक वणय वरमाय, गाँव टर-टर – (2)
कुतरी के बुलावी देण भेजी घर-घर
झेला
सतनारायणु की कथा कराड़चिड्यो
भालु तो शेख, बंदर घड़ियाल प भीड्यो
भयसी न गाय परसाद वाट-वाट तील्ली को
पशु पक्षि करि रया याव, बिल्ला बिल्ली को
अंतरा
नीतूर टीटीडीन होलगी, न नाच बताव-बताव – (2)
तोता अरु मैना, मोर पंख फैलाव
झेला
बगलो न हाड़ीयो पैसा खोब वराव
काबर न चील मसी-मसी न हळदी लगाव
शसल्यो न ऊट देख नाच, घोड़ी लील्ली को
पशु पक्षि करि रया याव, बिल्ला बिल्ली को
अंतरा
लग ड्रोन जसी खोब हवा, उड़ जब कापळ्य
कोना म मार फुसकार, सांप अरु सापळ्य
झेला
गंगाल म बढी गयो काब्जो न अरु मच्छी
सयडीयो न केकड़ो, उन्दरो खाय सोनलच्छी
चिड़िया-चिड्य ले मजो, घरूर की इल्ली को
पशु पक्षि करि रया याव, बिल्ला बिल्ली को
अंतरा
बकरी, गाडर अरु हिरण – पेरावणी लाया
कुकड़ा न केबुतर ने सबक कपड़ा पराया
झेला
सारस न हँस अरु गुबूडियो कर सावधान
बिल्ला-बिल्ली को यान यो केतरी छ र महान
फेशन को पेन्ट लायो गीदड, सीयेल दिल्ली को
अंतरा
मदमस्त हाथी जसो मस्त, भोलो पड़ भारी
चीता जसो लपक, महेश गीत बनवारी
झेला
शिवराम शेखचिल्ली को सपनु सुनायो
शिवशंकर भाई न याव यो खोब रघायो
रचना क खेल मत स समझो – डंडा गिल्ली को
पशु पक्षि करि रया याव, बिल्ला बिल्ली को
LYRICS IN ENGLISH
Song Title: Billa billi Ko Yaav
Song Type: Nimadi Comedy Folk Song
Lyricist / Writer: Shivshankar Ji Kushwaha
Singer: Gitesh Kumar Bhargava
Language: Nimadi
Genre / Style: Folk Comedy / Satire
Presented By: Nimadi Kalakar
Sthai
Man dekhyo raat ma ek sapno sakh chilli ko – (2)
Pashu pakshi kari raya yaav, billa billi ko
Antara 1
Dedar k ek vanay varmay, gaon tar-tar – (2)
Kutri ke bulavi den bheji ghar-ghar
Jhela
Satnarayanu ki katha karad-chidyo
Bhalu to sheikh, bandar ghadiyal pa bhidyo
Bhayasi na gaay prasad vaat-vaat teelli ko
Pashu pakshi kari raya yaav, billa billi ko
Antara 2
Neetur TTDN holgi, na naach batav-batav – (2)
Tota aru maina, mor pankh phailav
Jhela
Baglo na haadiyo paisa khob varav
Kabar na cheel masi-masi na haldi lagav
Shaslyo na oot dekh naach, ghodi leelli ko
Pashu pakshi kari raya yaav, billa billi ko
Antara 3
Lag drone jasi khob hawa, ud jab kaaply
Kona ma maar phuskaar, saanp aru saaply
Jhela
Gangal ma badhi gayo kaabjo na aru machhi
Saydiyo na kekdo, undaro khaay sonalacchi
Chidiya-chidy le majo, gharur ki illi ko
Pashu pakshi kari raya yaav, billa billi ko
Antara 4
Bakri, gaadar aru hiran – peravni laya
Kukda na kebutar ne sabak kapda paraya
Jhela
Saaras na hans aru guboodiyo kar saavdhan
Billa-billi ko yaan yo ketri chh ra mahaan
Fashion ko paint layo geedad, siyel Dilli ko
Antara 5
Madmast haathi jaso mast, bholo pad bhaari
Cheeta jaso lapak, Mahesh geet banwari
Jhela
Shivram Shekhchilli ko sapnu sunayo
Shivshankar bhai na yaav yo khob raghayo
Rachna k khel mat s samjho – danda gilli ko
Pashu pakshi kari raya yaav, billa billi ko
📖 गीत का विस्तृत भावार्थ
यह निमाड़ी हास्य लोकगीत सपनों की अतिरंजित दुनिया को दर्शाता है, जहाँ पशु-पक्षी इंसानों जैसे व्यवहार करते दिखाई देते हैं।
गीत का मूल भाव लोक व्यंग्य, सामाजिक हास्य और कल्पनाशीलता है।
🔹 प्रमुख भाव
शेखचिल्ली जैसे सपनों का चित्रण
ग्रामीण समाज की मासूम कल्पनाएँ
पशु-पक्षियों को मानवीय रूप देकर हँसी-मज़ाक के माध्यम से संदेश
आधुनिक चीज़ों (ड्रोन, फैशन, दिल्ली) का लोक शैली में व्यंग्य
🔹 सामाजिक संकेत
यह गीत बताता है कि:
हर बात को गंभीरता से नहीं लेना चाहिए
कल्पना और हास्य जीवन को सरल बनाते हैं
लोकगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज का आईना होते हैं
🔹 कलाकारों की विशेषता
शिशंकर जी कुशवाहा की रचना में लोकबुद्धि और व्यंग्य
गीतेश कुमार भार्गव की गायकी में निमाड़ीपन, ठेठपन और हास्य रस


