बोल बम बोल बम बोल बम बम Lyrics 2026
गीत परिचय — बोल बम बोल बम बोल बम बम
“बोल बम बोल बम बोल बम बम” एक जोशीला और उत्साह से भरपूर निमाड़ी लोकगीत है, जिसे निमाड़ी गरबी शैली में तैयार किया गया है। यह गीत भगवान शिव की भक्ति, सावन की उमंग और कांवड़ यात्रा के उत्साह को एक साथ प्रस्तुत करता है।
कंधे पर कांवड़ लेकर शिवजी के जयकारे लगाते कांवड़िए, सावन की फुहार, नर्मदा और गंगा के पावन किनारे और चारों ओर गूंजता “बोल बम” का जयघोष—इस गीत में कांवड़ यात्रा की इसी भक्ति और उल्लास को डांस बीट और निमाड़ी लोकसंगीत के रंग में पेश किया गया है।
गीत में सावन के पवित्र महीने का वर्णन करते हुए भगवान शिव से संकट दूर करने और अपनी कृपा बनाए रखने की प्रार्थना की गई है। कांवड़ में जल भरकर शिवजी को अर्पित करना, दान-धर्म करना और पूरी श्रद्धा के साथ “बोल बम” का जयकारा लगाना इस गीत की मुख्य भावनाओं को दर्शाता है।
यह गीत केवल शिव भक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें निमाड़ी संस्कृति, लोकभाषा और गरबी की पारंपरिक शैली का सुंदर मेल देखने को मिलता है। इसकी जोशीली धुन और नृत्यप्रधान अंदाज कांवड़ यात्रा के माहौल में उत्साह और भक्ति का रंग भरने के लिए तैयार किया गया है।
स्वर: Govind Patidar
गीतकार: Mohan Yadav
Official Release: Nimadi Kalakar
Song Producer: Gitesh Kumar Bhargava
“बोल बम बोल बम बोल बम बम” उन सभी शिवभक्तों और कांवड़ यात्रियों को समर्पित है, जिनके कदम सावन में भोलेनाथ की भक्ति के साथ आगे बढ़ते हैं।
हर हर महादेव! बोल बम!
बोल बम बोल बम बोल बम बम Lyrics 2026

कांधा धरी कावड़, बोल मुख सी हरदम,
बोल बम बोल बम बोल बम बम।
बीत्यो आषाढ़ मास, लगी गयो सावन,
सावन को महीनो, शिवजी को मनभावन।
संकट मिटाव, बोल सत्यम शिवम्,
बोल बम बोल बम बोल बम बम।
रेवा और गंगा का सजी गयो किनारा,
धरती प गूंज्यो रयो शिवजी को जयकारा।
शिवजी की भक्ति म भूली गयो गम,
बोल बम बोल बम बोल बम बम।
कांवड़ भरी नीर, शिवजी क चढ़ावा,
दान-धरम का दूवय हाथ बढ़ावा।
शिवजी की किरपा कदी होय नी कम,
बोल बम बोल बम बोल बम बम।
बोल बम बोल बम बोल बम बम Lyrics 2026

Bol Bam Bol Bam Bol Bam Bam
Kandha Dhari Kawad, Bol Mukh Si Hardam,
Bol Bam Bol Bam Bol Bam Bam.
Beetyo Ashaadh Maas, Lagi Gayo Sawan,
Sawan Ko Mahino, Shivji Ko Manbhavan.
Sankat Mitav, Bol Satyam Shivam,
Bol Bam Bol Bam Bol Bam Bam.
Rewa Aur Ganga Ka Saji Gayo Kinara,
Dharti Pe Gunjyo Rayo Shivji Ko Jaikara.
Shivji Ki Bhakti Ma Bhuli Gayo Gam,
Bol Bam Bol Bam Bol Bam Bam.
Kawad Bhari Neer, Shivji K Chadhaava,
Daan-Dharam Ka Doovay Haath Badhaava.
Shivji Ki Kirpa Kadi Hoy Ni Kam,
Bol Bam Bol Bam Bol Bam Bam.
गीत का भावार्थ
“बोल बम बोल बम बोल बम बम” एक जोशीला निमाड़ी लोकगीत है, जिसे निमाड़ी गरबी शैली में कांवड़ यात्रा और भगवान शिव की भक्ति को केंद्र में रखकर प्रस्तुत किया गया है। गीत में सावन के पवित्र महीने, कांवड़ यात्रा के उत्साह, शिवजी के जयकारों और भक्तों की आस्था का सुंदर चित्रण किया गया है।
पहला अंतरा — कांवड़ यात्रा का उत्साह
“कांधा धरी कावड़, बोल मुख सी हरदम,
बोल बम बोल बम बोल बम बम…”
इसका भाव है कि शिवभक्त अपने कंधे पर कांवड़ उठाकर भगवान शिव की भक्ति में आगे बढ़ रहे हैं। उनके मुख से हर समय “बोल बम” का जयघोष निकल रहा है। कांवड़ यात्रा में थकान और कठिनाइयों के बावजूद भक्तों के मन में उत्साह और शिवजी के प्रति श्रद्धा बनी रहती है।
यह पंक्तियाँ कांवड़ियों की भक्ति, ऊर्जा और भोलेनाथ के प्रति समर्पण को दर्शाती हैं।
दूसरा अंतरा — सावन और शिव भक्ति
“बीत्यो आषाढ़ मास, लगी गयो सावन,
सावन को महीनो, शिवजी को मनभावन…”
आषाढ़ का महीना बीत गया और सावन का पवित्र महीना आ गया है। सावन भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माना जाता है। इस महीने में वातावरण शिव भक्ति से भर जाता है और भक्त भगवान शिव की आराधना में लीन हो जाते हैं।
“संकट मिटाव, बोल सत्यम शिवम्…”
भक्त भगवान शिव से अपने जीवन के संकट और परेशानियाँ दूर करने की प्रार्थना करता है। सत्यम शिवम् के माध्यम से शिव को सत्य और कल्याण का स्वरूप मानते हुए उनकी शरण में जाने की भावना व्यक्त की गई है।
तीसरा अंतरा — पवित्र नदियाँ और शिव का जयकारा
“रेवा और गंगा का सजी गयो किनारा,
धरती प गूंज्यो रयो शिवजी को जयकारा…”
यहाँ रेवा यानी नर्मदा और गंगा जैसे पवित्र नदी तटों का सुंदर दृश्य सामने आता है। चारों ओर भक्तों की भीड़, भक्ति का वातावरण और भगवान शिव के जयकारों से धरती गूंज रही है।
“शिवजी की भक्ति म भूली गयो गम…”
शिव भक्ति में भक्त अपने सभी दुख-दर्द और परेशानियों को भूल जाता है। भोलेनाथ की भक्ति उसे मानसिक शांति और आनंद प्रदान करती है।
यह अंतरा बताता है कि सच्ची भक्ति में मनुष्य अपने जीवन के दुखों को भूलकर ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाता है।
चौथा अंतरा — जल अर्पण और दान-धर्म
“कांवड़ भरी नीर, शिवजी क चढ़ावा,
दान-धरम का दूवय हाथ बढ़ावा…”
कांवड़िए पवित्र जल लेकर भगवान शिव को अर्पित करते हैं। इसके साथ ही गीत में दान और धर्म के कार्य करने की प्रेरणा भी दी गई है। दोनों हाथों से सेवा और पुण्य के कार्य करने की भावना व्यक्त की गई है।
“शिवजी की किरपा कदी होय नी कम…”
भक्त को विश्वास है कि भगवान शिव की कृपा हमेशा उसके ऊपर बनी रहेगी और भोलेनाथ अपने भक्तों पर कभी कृपा कम नहीं करेंगे।
गीत का मुख्य संदेश
इस पूरे गीत का मूल भाव शिव भक्ति, कांवड़ यात्रा, सावन की उमंग और निमाड़ी लोकसंस्कृति है।
गीत यह संदेश देता है कि जब इंसान पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान शिव की भक्ति में आगे बढ़ता है, तो उसके मन से भय, चिंता और दुख दूर होने लगते हैं। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन, सेवा, भक्ति और सामूहिक उत्साह का प्रतीक बन जाती है।
निमाड़ी गरबी की जोशीली शैली में प्रस्तुत यह गीत कांवड़ यात्रा के वातावरण को और भी उत्साहपूर्ण बनाता है। “बोल बम” का बार-बार होने वाला जयघोष भक्तों के उत्साह और भोलेनाथ के प्रति अटूट श्रद्धा को दर्शाता है।
यह गीत भगवान शिव के सभी भक्तों, कांवड़ यात्रियों और निमाड़ी लोकसंस्कृति को समर्पित एक भक्तिमय और नृत्यप्रधान लोकगीत है।
हर हर महादेव!
बोल बम! बोल बम!


