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निमाड़ी गणगौर लोकगीत चैत महिनो सुहानो आयो रे सखी – गणगौर पर्व निमाड़

चैत महिनो सुहानो आयो रे सखी -निमाड़ी गणगौर लोकगीत -Gitesh Kumar Bhargava

चैत महिनो सुहानो आयो रे सखी | निमाड़ी गणगौर लोकगीत | Gitesh Kumar Bhargava

यह गीत चैत महीने में मनाए जाने वाले गणगौर पर्व की खुशी, भक्ति और निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है, जिसमें गांव-गली, घर-घर उत्सव और माता गौर की आराधना का सुंदर चित्रण है।

निमाड़ी गणगौर लोकगीत चैत महिनो सुहानो आयो रे सखी – गणगौर पर्व निमाड़
निमाड़ी गणगौर लोकगीत

🎶 गीत विवरण

गीत नाम: चैत्र महिनो सु

चैत महिनो सुहानो आयो रे सखी

निमाड़ी गणगौर लोकगीत

यह गीत चैत्र महीने में मनाए जाने वाले गणगौर पर्व की खुशी, भक्ति और निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाता है, जिसमें गांव-गली, घर-घर उत्सव और माता गौर की आराधना का सुंदर चित्रण है।

 


  • गीत प्रकार: निमाड़ी गणगौर लोकगीत

  • रचनाकार (Lyrics): राजेश भाई रेवळिया

  • गायक (Singer): गीतेश कुमार भार्गव

  • भाषा: निमाड़ी

  • विषय: गणगौर पर्व / माता गौर भक्ति

  • प्रस्तुति: Nimadi Kalakar


🎼 भजन के बोल

 

🔸 स्थायी

चैत महिनो सुटानो आयो रे सखी,
आयो गणगौर पर्व आयो रे सखी


 1

रनु रोयण संग सेयत गौर बाई,
अपणा पीयर म धारय बसणे झाई।

सबको खुशी सी मन हबोयो रे सखी,
आयो गणगौर पर्व लायो रे सखी


 2

गांव-गली न म छाई रुसणाई,
बाज ढोल-दप, बज शहनाई।

घर-घर म आनंद छायो रे सखी,
आयो गणगौर पर्व लायो रे सखी


 3

मेहंदी मिसि न माता क लगावा,
सोला श्रृंगार सी माता क सजावा।

भक्ति को रंग बड़ों छायो रे सखी,
आयो गणगौर पर्व लायो रे सखी


अंतरा 4

माता का झालरिया गाव नर-नारी,
माता की ममता म दुनिया सारी।

गीत राजेश न गणगौर गायो रे सखी,
आयो गणगौर पर्व लायो रे सखी

नो आयो रे सखी

🎶 Song Information

Song Name: Chait Mahino Sutano Aayo Re Sakhi

Song Type: Nimadi Gangaur Lokgeet

Lyrics: Rajesh Bhai Revaliya

Singer: Gitesh Kumar Bhargava

Language: Nimadi

Theme: Gangaur Festival / Mata Gaur Devotion

Presented By: Nimadi Kalakar

English

Sthai 

 

Chait mahino sutano aayo re sakhi,
Aayo Gangaur parv aayo re sakhi

1

Ranu royan sang seyat Gaur bai,
Apna peer ma dharay basna jhaai.

Sabko khushi si man haboyo re sakhi,
Aayo Gangaur parv laayo re sakhi

 2

Gaon-gali ma chhai rusanai,
Baaj dhol-dap, baj shehnai.

Ghar-ghar ma anand chhayo re sakhi,
Aayo Gangaur parv laayo re sakhi

 3

Mehndi misi na mata ka lagava,
Sola shringar si mata ka sajava.

Bhakti ko rang bado chhayo re sakhi,
Aayo Gangaur parv laayo re sakhi

 4

Mata ka jhalariya gaav nar-naari,
Mata ki mamta ma duniya saari.

Geet Rajesh na Gangaur gaayo re sakhi,
Aayo Gangaur parv laayo re sakhi

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यह निमाड़ी गणगौर लोकगीत “चैत्र महिनो ” निम्न प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है:

निमाड़ी गणगौर लोकगीत “चैत महिनो सुहानो आयो रे सखी” चैत महीने में मनाए जाने वाले पावन गणगौर पर्व की भक्ति, उल्लास और सांस्कृतिक गरिमा का जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। यह गीत निमाड़ अंचल की लोकपरंपरा में रचे-बसे गणगौर उत्सव को अत्यंत सरल, मधुर और भावनात्मक शब्दों में अभिव्यक्त करता है।

गीत की शुरुआत चैत महीने के आगमन के साथ होती है, जब प्रकृति में नवजीवन दिखाई देता है और गांव-गांव में गणगौर पर्व की तैयारियाँ प्रारंभ हो जाती हैं। महिलाएँ माता गौर के स्वागत के लिए उत्साहित होती हैं और पूरे वातावरण में खुशी की लहर दौड़ जाती है। ढोल, ढप और शहनाइयों की मधुर ध्वनि से गांव-गली गूंज उठती है, जिससे पर्व का उल्लास और भी बढ़ जाता है।

गीत में माता गौर के श्रृंगार का सुंदर वर्णन मिलता है। महिलाएँ माता को मेहंदी, कुमकुम और सोलह श्रृंगार से सजाती हैं, जो उनकी गहन श्रद्धा और आस्था को दर्शाता है। यह श्रृंगार केवल बाहरी सजावट नहीं, बल्कि भक्तों के हृदय में बसे प्रेम और भक्ति का प्रतीक है। माता की ममता को गीत में विशेष रूप से उकेरा गया है, जहाँ कहा गया है कि उनकी कृपा पूरी दुनिया को अपने आंचल में समेटे हुए है।

अंत में यह गीत सामूहिक भक्ति और सामाजिक एकता का संदेश देता है। नर-नारी मिलकर माता गौर की आराधना करते हैं और लोकगीतों के माध्यम से अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। यह गीत न केवल एक धार्मिक प्रस्तुति है, बल्कि निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक पहचान, लोकभावना और परंपरा का सजीव दस्तावेज भी है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी गणगौर पर्व की महिमा को जीवित रखता है।

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