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दिन भयकटा वंजारा हुइगा - Nimadi lyrics 2026

दिन भयकटा वंजारा हुइगा – Nimadi lyrics 2026

दिन भयकटा वंजारा हुइगा – Nimadi lyrics 2026

लेखक – राकेश गीते जी ” रागी “

दिन भयकटा वंजारा हुइगा - Nimadi lyrics 2026
दिन भयकटा वंजारा हुइगा – Nimadi lyrics 2026

जिनगी का पौ-बारा हुइगा
फुलीनऽ हम गुब्बारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा

एक न एक मिली होय एक
कबी मिलीनऽ ग्यारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा

थोड़ा दिन पयलऽ भेळऽ था
पतो नी केऊं न्यारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा

जिनगी भर भटकी भटकीन
दिन भयकटा वंजारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा

सयर म अकेला रइ – रइनऽ
हम बी जरा एक्खारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा

पड़s-पड़s सब रिस्ता-नाता
कड़वा -खाटा – खारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा

कुण लायो अम्मर पट्टो ‘रागी’
मर्याकी कीच्चड़-गारा हुइगा

दिन भयकटा वंजारा हुइगा


Din Bhaykata Vanjara Huiga – Nimadi Lyrics 2026

Writter – Rakesh Geete ” Ragi “

दिन भयकटा वंजारा हुइगा - Nimadi lyrics 2026
दिन भयकटा वंजारा हुइगा – Nimadi lyrics 2026

Jingi Ka Pau-Bara Huiga
Phuleen’n Hum Gubbara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga

Ek Na Ek Mili Hoy Ek
Kabi Milin’n Gyara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga

Thoda Din Payal’n Bhel’n Tha
Pato Ni Keun Nyara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga

Jingi Bhar Bhatki Bhatkin
Din Bhaykata Vanjara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga

Sayar Ma Akela Rai-Rain’n
Hum Bi Jara Ekkhara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga

Pad’s-Pad’s Sab Rista-Nata
Kadwa-Khata-Khara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga

Kun Layo Ammar Patto ‘Ragi’
Maryaki Keechad-Gara Huiga

Din Bhaykata Vanjara Huiga


दिन भयकटा वंजारा हुइगा – भावार्थ 

दिन भयकटा वंजारा हुइगा - Nimadi lyrics 2026
दिन भयकटा वंजारा हुइगा – Nimadi lyrics 2026

यह गीत जीवन की अनिश्चितता, समय के परिवर्तन, रिश्तों की सच्चाई और मनुष्य की अकेली यात्रा को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करता है। कवि बताता है कि जीवन का हर दिन एक भटकते हुए बंजारे की तरह गुजरता जा रहा है। इंसान खुशियों, अपनों और मंज़िल की तलाश में पूरी जिंदगी भटकता रहता है, लेकिन अंत में उसे एहसास होता है कि सब कुछ क्षणभंगुर है।

“जिनगी का पौ-बारा हुइगा, फुलीनऽ हम गुब्बारा हुइगा”
कवि कहता है कि जीवन ने कई उतार-चढ़ाव देख लिए हैं। कभी खुशियाँ मिलीं तो मन गुब्बारे की तरह फूल गया, लेकिन वह खुशी भी हमेशा टिक नहीं सकी।

“एक न एक मिली होय एक, कबी मिलीनऽ ग्यारा हुइगा”
जीवन में कभी कुछ मिलता है तो कभी बहुत कुछ मिल जाता है। सफलता और अवसर हमेशा एक जैसे नहीं रहते; समय के साथ उनका स्वरूप बदलता रहता है।

“थोड़ा दिन पयलऽ भेळऽ था, पतो नी केऊं न्यारा हुइगा”
जो लोग कभी बहुत अपने थे, वे समय के साथ जाने क्यों दूर हो गए। रिश्तों में आई दूरी और बदलाव जीवन की सच्चाई है।

“जिनगी भर भटकी भटकीन, दिन भयकटा वंजारा हुइगा”
मनुष्य पूरी जिंदगी कुछ न कुछ पाने की तलाश में भटकता रहता है। देखते-देखते हर दिन एक बंजारे की तरह सफर करता हुआ निकल जाता है।

“सयर म अकेला रइ-रइनऽ, हम बी जरा एक्खारा हुइगा”
जीवन की इस यात्रा में इंसान कई बार खुद को अकेला महसूस करता है। संघर्ष और अनुभव उसे भीतर से मजबूत, गंभीर और आत्मनिर्भर बना देते हैं।

“पड़s-पड़s सब रिस्ता-नाता, कड़वा-खाटा-खारा हुइगा”
समय के साथ रिश्तों की परख होती है। कुछ रिश्ते मधुर रहते हैं, तो कुछ में कड़वाहट, शिकायत और दूरी आ जाती है। यही जीवन का वास्तविक अनुभव है।

“कुण लायो अम्मर पट्टो ‘रागी’, मर्याकी कीच्चड़-गारा हुइगा”
कवि ‘रागी’ कहते हैं कि इस संसार में कोई भी अमर होकर नहीं आया। अंततः हर मनुष्य उसी मिट्टी में मिल जाता है, जहाँ से उसका शरीर बना है। इसलिए घमंड, मोह और अहंकार का कोई स्थायी महत्व नहीं है।

समग्र संदेश:
यह गीत हमें सिखाता है कि जीवन एक निरंतर चलने वाली यात्रा है। सुख-दुख, मिलन-बिछड़न, रिश्ते, सफलता और असफलता—सब समय के साथ बदलते रहते हैं। इसलिए मनुष्य को विनम्र रहकर अच्छे कर्म करने चाहिए, क्योंकि अंत में सब कुछ यहीं रह जाता है और केवल कर्मों की छाप ही लोगों के दिलों में जीवित रहती है।

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