गहरी नर्मदा न गेहरो पानी No1 Nimadi Narmada Bhajan – Lyrics

🎵 भजन परिचय
“गहरी नर्मदा न गेहरो पानी” एक अत्यंत भावपूर्ण और आध्यात्मिक भजन है, जिसे प्रसिद्ध भजन गायक आश्विन यदुवंशी जी ने अपनी सरल, करुण और आत्मा को छू लेने वाली गायकी में प्रस्तुत किया है। यह भजन माँ नर्मदा को केवल एक नदी के रूप में नहीं, बल्कि मोक्षदायिनी माँ, जीवन-संसार की पार लगाने वाली शक्ति के रूप में स्मरण करता है।
नर्मदा यहाँ संसार-सागर का प्रतीक है—जो गहरा है, भयावह है, और जिसमें जीव बार-बार डगमगाता है। भजन में भक्त माँ से विनती करता है कि वह उसे इस भवसागर से पार लगा दें।
गहरी नर्मदा न गेहरो पानी

गहरी नर्मदा न गेहरो पानी,
ओ गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैय्या पार लगाऊजो।।
काम क्रोध काच मच बसत है,
ए लोभ को मगर देखाय हो,
मैय्या पार लगाऊजो,
गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैय्या पार लगाऊजो।।
सत की नाव केवटीया सतगुरु,
सुमिरण नाम आधार हो,
मैय्या पार लगाऊजो,
गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैय्या पार लगाऊजो।।
धर्मी धर्मी पार उतरिया,
पापी डूबियाँ मजधार हो,
मैय्या पार लगाऊजो,
गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैय्या पार लगाऊजो।।
गहरी नर्मदा न गेहरो पानी,
ओ गहरी नर्मदा ने गेहरो पानी,
देखी न जीव घबराये हो,
मैय्या पार लगाऊजो।।
Gehri Narmada na gehro paani,
O gahri Narmada ne gehro paani,
Dekhi na jeev ghabraaye ho,
Maiyya paar lagaaujo.
Kaam krodh kaach mach basat hai,
Ae lobh ko magar dekhaay ho,
Maiyya paar lagaaujo,
Gahri Narmada ne gehro paani,
Dekhi na jeev ghabraaye ho,
Maiyya paar lagaaujo.
Sat ki naav kevatiya satguru,
Sumiran naam aadhaar ho,
Maiyya paar lagaaujo,
Gahri Narmada ne gehro paani,
Dekhi na jeev ghabraaye ho,
Maiyya paar lagaaujo.
Dharmi dharmi paar utariya,
Paapi doobiya manjhdhaar ho,
Maiyya paar lagaaujo,
Gahri Narmada ne gehro paani,
Dekhi na jeev ghabraaye ho,
Maiyya paar lagaaujo.
Gahri Narmada na gehro paani,
O gahri Narmada ne gehro paani,
Dekhi na jeev ghabraaye ho,
Maiyya paar lagaaujo.
भजन की विस्तृत व्याख्या

1️⃣ “गहरी नर्मदा न गेहरो पानी…”
यह पंक्ति जीवन की गहराई और कठिनाई को दर्शाती है।
नर्मदा का गहरा पानी यहाँ संसार के दुःख, मोह, भ्रम और अनिश्चितता का प्रतीक है।
जब जीव इस गहराई को देखता है, तो वह घबरा जाता है—क्योंकि अकेले उसके पास कोई सहारा नहीं होता।
➡️ इसलिए भक्त पुकारता है:
“मैय्या पार लगाऊजो”
अर्थात—हे माँ, मुझे इस संसार-सागर से पार करा दो।
2️⃣ “काम क्रोध काच मच बसत है…”
यहाँ भजन मानव जीवन की सबसे बड़ी बाधाओं को उजागर करता है—
काम (वासना), क्रोध (गुस्सा) और लोभ (लालच)।
ये तीनों मनुष्य को भीतर से अशांत कर देते हैं और सही मार्ग देखने नहीं देते।
लोभ को “मगर” कहा गया है—जो चुपचाप डुबो देता है।
➡️ भक्त स्वीकार करता है कि वह इन विकारों से घिरा है,
और माँ से प्रार्थना करता है कि वह उसे बचा ले।
3️⃣ “सत की नाव केवटीया सतगुरु…”
यह भजन का सबसे गूढ़ और सुंदर आध्यात्मिक संदेश है।
सत (सत्य) = नाव
सतगुरु = केवट (नाव चलाने वाला)
नाम-सुमिरन = जीवन का एकमात्र आधार
अर्थ यह कि संसार-सागर से पार जाने का मार्ग
👉 सत्य,
👉 सतगुरु की शरण,
👉 और ईश्वर के नाम का स्मरण है।
माँ नर्मदा यहाँ गुरु-तत्व और ईश्वर-कृपा का रूप ले लेती हैं।
4️⃣ “धर्मी धर्मी पार उतरिया…”
यह पंक्ति कर्म-सिद्धांत को स्पष्ट करती है।
जो धर्म के मार्ग पर चलते हैं,
वे संसार-सागर पार कर जाते हैं।जो पाप, अहंकार और मोह में डूबे रहते हैं,
वे बीच मझधार में ही डूब जाते हैं।
यह चेतावनी भी है और प्रेरणा भी—
कि जीवन को धर्म और सत्य के साथ जियो।
🌺 समग्र भाव
यह भजन हमें सिखाता है कि—
संसार गहरा और भयावह है
मानव कमजोर है और विकारों से घिरा है
केवल माँ नर्मदा की कृपा,
सतगुरु का मार्गदर्शन,
और नाम-स्मरण ही हमें पार लगा सकता है
आश्विन यादववंशी जी की गायकी इस भजन को केवल सुनने का नहीं,
बल्कि अनुभव करने का साधन बना देती है।


