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सून म्हारा पाणी बाबा – उद्धव भाई यादव | किसान व्यंग्य गीत | Nimadi Lokgeet Lyrics & Meaning
“सून म्हारा पाणी बाबा” उद्धव भाई यादव द्वारा रचित एक व्यंग्यात्मक निमाड़ी किसान गीत है, जिसमें बदले हुए मौसम, बेमौसम बारिश और किसान को होने वाले नुकसान का मार्मिक व हास्य मिश्रित वर्णन है। गीत के शब्द, अर्थ और सम्पूर्ण व्याख्या यहाँ पढ़ें।
Song Title : Sun mhara paani Baba
Category: Nimadi Folk farmers song
Language: Nimadi
Singer: Gitesh kumar bhargava
Lyricist: Udhav Yadav
Theme: indaian formers problems
Region: Nimar (Madhya Pradesh, India)
सून म्हारा पाणी बाबा
Udhav Bhai Yadav Nimadi Song
Nimadi Kisan Vyanga Geet
किसान व्यंग्य गीत
Nimadi Lokgeet Lyrics
बेमौसम बारिश किसान नुकसान
🎵 सून म्हारा पाणी बाबा – Lyrics (Nimadi Lokgeet)
गीत का अर्थ और विस्तृत व्याख्या (Full Explanation)
उद्धव भाई यादव ने इस गीत में किसान की समस्याओं को हास्य, व्यंग्य और दर्द के साथ पिरोया है। गीत का हर अंतरा मौसम के कहर को उजागर करता है—लेकिन भाषा में व्यंग्य है, जिससे सुनने वाले को हँसी भी आती है और किसान का दर्द भी समझ आता है।
✨ मुख्य भाव
बार-बार होने वाली बेमौसम बारिश
कपास/सोयाबीन जैसी फसलों का नुकसान
मौसम पर निर्भर किसान की मजबूरी
नुकसान के बाद मुआवजे की अनिश्चितता
प्रकृति से विनती और व्यंग्यात्मक शिकायत
अंतरा-वार व्याख्या
1. “सून म्हारा पाणी बाबा, अब थारा पाँय लागा”
किसान बारिश से परेशान होकर विनती करता है –
“हे पानी बाबा! अब तो दया करो, मत बरसो, अब हम थारे पाँय लागा।”
बारिश की अधिकता से खेत में पानी भर गया है, जिससे फसल बर्बाद होने लगी है।
2. “हमरा कपास का घेटा… काळा-काळा”
कपास की फलियाँ पकने से पहले ही भीग गईं।
कपास गीला होकर काला पड़ गया – इसका मतलब है पूरी फसल चौपट।
किसान लिखता है कि इतने “नाना-नाना लिखरु”—कई बार रोका, पर अब क्या करे।
3. “मीरी एन पुरी आदि… किसाण भर थारा रांगा”
लगातार बारिश ने किसान का पूरा ‘रांगा’ — मेहनत का रंग ही खराब कर दिया।
किसान अपनी मेहनत और उम्मीदों को टूटता हुआ देख रहा है।
4. “पाछला झूवारा बाबा… रोज रोज़ तू आव रे”
यहाँ व्यंग्य है—
कभी झूवारा (फुहार), कभी तेज बरसात — रोज नया मौसम।
जब किसान खेत पहुँचता है तो उसकी मीरी (मिर्च/फसल) की “चिन्ल्या चांव”—
दिखती है कि बारिश ने सब खराब किया है।
5. “किसान को नुकसानों… कहा सी मुवावजो मांगा”
सबसे मार्मिक पंक्तियाँ—
नुकसान तो दिखता है, पर मुआवज़ा कहाँ से मांगें?
कौन सुनेगा किसान?
यह एक बड़ा सामाजिक व्यंग्य है।
6. “श्रावण बरस्यो… भादव में आव छिंटो मोटो”
बारिश का समय तय नहीं।
श्रावण में भारी बारिश और भादव में भी छिंटे—
इससे फसल का चक्र और खराब।
7. “सोयाबीन भी सब खतम… पानी का भरी गया लांगों”
अंत में किसान दुखी होकर बताता है—
सोयाबीन खेत में पानी भरने से पूरी तरह नष्ट हो गई।
बस पानी के लांगे (नालियाँ/बहाव) ही दिख रहे हैं।
यह किसान की त्रासदी का चरम है।
📌 Conclusion
“सून म्हारा पाणी बाबा” सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि किसान की पीड़ा, बदलते मौसम का प्रभाव और प्रकृति पर निर्भर खेती का यथार्थ चित्रण है। उद्धव भाई यादव ने व्यंग्य और हास्य को मिलाकर एक ऐसा निमाड़ी गीत दिया है जो दिल को छू भी जाता है और सोचने पर मजबूर भी करता है।



