निमाड़ी कलाकार

झूलो झूलो घनश्याम - NIMADI LYRICS 2026

झूलो झूलो घनश्याम – NIMADI LYRICS 2026

झूलो झूलो घनश्याम – NIMADI LYRICS 2026

निमाड़ी माटी की मिठास और भगवान श्री कृष्ण की भक्ति से सराबोर यह लोकगीत जन्माष्टमी के पावन अवसर पर हर श्रद्धालु के हृदय को आनंदित कर देता है।

गीत परिचय

झूलो झूलो घनश्याम - NIMADI LYRICS 2026
झूलो झूलो घनश्याम – NIMADI LYRICS 2026

झूलो झूलो घनश्याम झूलो घनश्याम झूलो तुम नन्द घर आंगणा
गुण गवा यशोदा जी न लालणा , झूलो झूलो घनश्याम झूलो

मथुरा जी म लियो अवतार
नन्द यशोदा न कियो जय जय कार
भाग जाग्या हो ब्रज ग्वाल बालना
झूलो झूलो घनश्याम झूलो

राम अवतार म कौसल्या का जाया
वही माता देवकी का कृष्णा कहाया
पूरा करिया मनोरथ गोपी ग्वालना
झूलो झूलो घनश्याम झूलो

माता कैकयी का कलंक मिटाया
भादवृद्धि अस्टमी क गोकुल म आया
माता कैकयी यशोदा तुम पालना
झूलो झूलो घनश्याम झूलो

कुंजन म फूली जनक फुलवारी
सोलह सोउ गोपी न म कुञ्ज बिहारी
प्रभु झूलो कदम डाली झूलना
झूलो झूलो घनश्याम झूलो

जनम जनम की कीरति गावा
मनका मनोरथ आज प्रभु पावा
देवो भक्ति नानू का यह बोलना
झूलो झूलो घनश्याम झूलो


झूलो झूलो घनश्याम – NIMADI LYRICS 2026

झूलो झूलो घनश्याम - NIMADI LYRICS 2026
झूलो झूलो घनश्याम – NIMADI LYRICS 2026

Jhulo jhulo Ghanshyam jhulo Ghanshyam , jhulo tum Nand ghar aangana

Gun gawa Yashoda ji na lalana,

jhulo jhulo Ghanshyam jhulo…..

Mathura ji ma liyo awatar

Nand Yashoda na kiyo jay jay kar

Bhag jagya ho Braj gwal balana

Jholo jholo Ghanshyam jholo…..

Ram awatar ma Kausalya ka jaya

Wahi mata Devaki ka Krishna kahaya

Pura kariya manorath Gopi gwalna

Jholo jholo Ghanshyam jholo…..

Mata Kaikeyi ka kalank mitaya

Bhadravriddhi astami ka Gokul ma aaya

Mata Kaikeyi Yashoda tum palana

Jholo jholo Ghanshyam jholo….

Kunjan ma phuli Janak phulwari

Solah sou Gopin ma Kunj Bihari

Prabhu jholo kadam dali jholana

Jholo jholo Ghanshyam jholo

Janam janam ki kirati gawa

Manka manorath aaj Prabhu pawa

Devo bhakti Nanu ka yeh bolana

Jholo jholo Ghanshyam jholo…..


झूलो झूलो घनश्याम - NIMADI LYRICS 2026
झूलो झूलो घनश्याम – NIMADI LYRICS 2026

यह निमाड़ी लोकगीत भगवान श्री कृष्ण के बाल रूप, उनके अवतार की महिमा और राम-कृष्ण के अभिन्न रूप का एक बेहद भावुक और सुंदर वर्णन है।

लोकगीत का  भावार्थ

  • नंद के आंगन में झूले कन्हाई: गीत की शुरुआत में माता यशोदा के लाल (कृष्ण) को नंद बाबा के आंगन में झूला झूलने का आग्रह किया जा रहा है। भक्त प्रेम से यशोदा नंदन के गुणों का गान कर रहे हैं और प्रभु को हिंडोले में झूलने के लिए पुकार रहे हैं।

  • मथुरा अवतार और ब्रज का सौभाग्य: प्रभु ने मथुरा नगरी में अवतार लिया है, जिससे नंद बाबा और माता यशोदा के घर जय-जयकार हो रही है। भगवान के आगमन से ब्रज के सभी ग्वाल-बालों और ब्रजवासियों के सोए हुए भाग्य जाग उठे हैं।

  • राम ही कृष्ण हैं: जो प्रभु त्रेतायुग में श्री राम बनकर माता कौशल्या के धाम जन्मे थे, वही द्वापरयुग में माता देवकी के पुत्र ‘कृष्ण’ कहलाए। भगवान ने कृष्ण अवतार लेकर गोपियों और ग्वालों की वर्षों पुरानी मनोकामनाओं (मनोरथ) को पूरा किया है।

  • भाद्रपद की अष्टमी का पावन समय: प्रभु ने माता कैकेयी पर लगे उस कलंक को मिटाया (जहाँ राम रूप में वे वनवास गए थे, वहीं कृष्ण रूप में लीला रचाकर हर दुविधा दूर की)। भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को प्रभु गोकुल पधारे हैं। यहाँ कैकेयी और यशोदा दोनों माताओं का प्रेम प्रभु के पालने में झिलमिला रहा है।

  • कुंज बिहारी की रासलीला: जनक जी की बगिया की तरह ही ब्रज के कुंजों (लता-मण्डपों) में भी आनंद की फूलवारी खिल उठी है। सोलह हजार गोपियों के बीच विराजमान होकर प्रभु ‘कुंज बिहारी’ कहलाए हैं। भक्त प्रार्थना करते हैं कि हे प्रभु! आप कदंब के पेड़ की डाल पर डाले गए झूले में बैठकर झूलिए।

  • भक्त की प्रार्थना और फलश्रुति: अंत में गीतकार (स्व. श्री नानू दादा साठे) कहते हैं कि हम जन्म-जन्मान्तर से आपकी कीर्ति और महिमा गाते आ रहे हैं। आज आपके दर्शन और भक्ति पाकर हमारे मन का हर मनोरथ पूर्ण हो गया है। ‘नानू’ प्रभु से बस यही विनती करता है कि हमें आपकी निष्काम भक्ति का वरदान प्राप्त हो।

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