कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया – Gitesh Kumar Bhargava
🎶 कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया – Lyrics Rajesh bhai Revaliya
(Shiv Ji Kanwar Bhajan Lyrics)
श्रावण मास में शिव भक्तों का कांवड़ भजन
भजन विवरण
भजन नाम: कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया भजन प्रकार: शिव कांवड़ भजन विषय: भगवान शिव भक्ति / श्रावण मास भाषा: हिंदी शैली: पारंपरिक भक्ति / लोक भजन
Bhajan Information
Bhajan Title: Kawadiya Re Chalo, Chalo Shiv Bhole Ki Bhajan Type:Shiv Bhajan Singer: Gitesh Kumar Bhargava Lyrics / Writer: Rajesh Bhai Revaliya Theme: Lord Shiva Devotion / Shravan Month Language: Hindi Style: Traditional Devotional / Folk Bhajan Presented By: Nimadi Kalakar
🎼 भजन के बोल
स्थायी
कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया बम-बम बोलो, कट जायेगी डगरिया कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया
अंतरा 1
मस्त महिना, श्रावण आया रिमझिम-रिमझिम बूदे लाया धरती ने हरि-हरि ओढ़ी रे चुनरिया कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया
अंतरा 2
कांधे पे कावड़ को उठाकर मन में शिव का ध्यान लगाकर रेवा के जल की भक्तो, भर के गगरिया कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया
अंतरा 3
पल में सबकी विपदा हरते जो भी शिव का सुमिरन करते भक्तों की वो तो अपने, रखले खबरिया कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया
अंतरा 4
देवों के महादेव हैं भोले किस्मत के सब ताले खोले भक्ति की धुन में राजेश, बीते उमरिया कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया
Kawadiya re chalo, chalo Shiv Bhole ki nagariya Bam-bam bolo, kat jaayegi dagariya Kawadiya re chalo, chalo Shiv Bhole ki nagariya
1
Mast mahina, Shravan aaya Rimjhim-rimjhim boonde laaya Dharti ne hari-hari odhi re chunariya Kawadiya re chalo, chalo Shiv Bhole ki nagariya
2
Kaandhe pe kawad ko uthaakar Man mein Shiv ka dhyaan lagaakar Reva ke jal ki bhakto, bhar ke gagariya Kawadiya re chalo, chalo Shiv Bhole ki
3
Pal mein sabki vipda harte Jo bhi Shiv ka sumiran karte Bhakton ki wo to apne, rakhle khabariya Kawadiya re chalo, chalo Shiv Bhole ki nagariya
4
Devon ke Mahadev hain Bhole Kismat ke sab taale khole Bhakti ki dhun mein Rajesh, beete umariya Kawadiya re chalo, chalo Shiv Bhole ki nagariya
🎧 Streaming Availability
यह भजन “Kawadiya Re Chalo, Chalo Shiv Bhole Ki” निम्न डिजिटल म्यूज़िक प्लेटफ़ॉर्म्स पर भी उपलब्ध है, जहाँ श्रोता इसे ऑनलाइन सुन सकते हैं:
यह भजन श्रावण मास में भगवान शिव की कांवड़ यात्रा पर आधारित एक अत्यंत भक्तिपूर्ण और प्रेरणादायक रचना है। भजन का प्रत्येक पद शिवभक्तों को आस्था, उत्साह और विश्वास के साथ भोलेनाथ की नगरी की ओर चलने का आह्वान करता है।
🔹 स्थायी (मुखड़ा) का भाव
“कावड़िया रे चलो, चलो शिव भोले की नगरिया” यह पंक्ति शिवभक्तों को आमंत्रण देती है कि वे कांवड़ उठाकर भोलेनाथ के धाम की ओर प्रस्थान करें। “बम-बम बोलो, कट जायेगी डगरिया” यह संदेश देती है कि शिव का नाम लेने से यात्रा की कठिनाइयाँ सहज हो जाती हैं और रास्ते की थकान समाप्त हो जाती है।
🔹 अंतरा 1 का भाव
इस अंतरे में श्रावण मास की सुंदरता का चित्रण है। बारिश की रिमझिम बूँदें धरती को हरियाली से ढँक देती हैं, मानो प्रकृति स्वयं शिवभक्ति में लीन हो गई हो। धरती की हरी चुनरिया यह दर्शाती है कि पूरा वातावरण भक्तिमय और पवित्र हो जाता है।
🔹 अंतरा 2 का भाव
यहाँ कांवड़ यात्रा की विधि और भावना बताई गई है। शिवभक्त कंधे पर कांवड़ उठाकर, मन में भोलेनाथ का ध्यान रखते हुए रेवा (नर्मदा) के पवित्र जल को भरते हैं। यह जल शिवलिंग पर अर्पित किया जाता है, जो भक्ति, तप और समर्पण का प्रतीक है।
🔹 अंतरा 3 का भाव
इस अंतरे में भगवान शिव की करुणा और कृपालु स्वभाव का वर्णन है। जो भक्त सच्चे मन से शिव का स्मरण करता है, भोलेनाथ उसकी सभी विपदाओं को पल भर में दूर कर देते हैं। वे अपने भक्तों की हर परिस्थिति की खबर रखते हैं और सदा उनकी रक्षा करते हैं।
🔹 अंतरा 4 का भाव
यह अंतरा भगवान शिव की महिमा और सर्वशक्तिमान स्वरूप को दर्शाता है। भोलेनाथ देवों के भी देव हैं, जो भक्तों की किस्मत के बंद ताले खोल देते हैं। यहाँ रचनाकार यह भी संकेत करता है कि जीवन भक्ति की धुन में सहज, शांत और आनंदमय बन जाता है।
🪔 भजन का मूल संदेश
इस भजन का सार यह है कि:
सच्ची भक्ति से हर कठिनाई आसान हो जाती है
श्रावण मास में शिव भक्ति का विशेष महत्व है
भगवान शिव अपने भक्तों पर सदैव कृपा करते हैं
कांवड़ यात्रा केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और आत्मिक शुद्धि का मार्ग है