निमाड़ी कलाकार

लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics
लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

“आयो आयो राखी को तिवार, पीयर हाऊ जाऊँगा…”

राखी के पावन त्योहार पर भाई-बहन के अटूट प्रेम, बचपन की मीठी यादों और मायके की भावुक पुकार को समर्पित एक हृदयस्पर्शी निमाड़ी लोकगीत

इस गीत में एक बहन के मन की वो भावनाएँ हैं, जो राखी आते ही उसे अपने पीयर (मायके) की ओर खींच ले जाती हैं। भाई-भाभी का प्रेम, मम्मी-पप्पा की याद, दादा-दादी का स्नेह और बचपन की अनमोल यादें—इन सभी भावनाओं को निमाड़ी लोकभाषा की मिठास के साथ प्रस्तुत किया गया है।

गीत में बहन कहती है कि उसे न लहंगा चाहिए, न साड़ी, न पायल और न ही सोने का हार… उसे तो बस चाहिए अपने पीयर का प्यार और अपने परिवार का स्नेह।

स्वर: Rishika Patwa
गीतकार: Gitesh Kumar Bhargava एवं Govind Patidar
Official Release: Nimadi Kalakar

यह गीत समर्पित है उन सभी बहनों को, जिनके लिए राखी सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि अपने मायके और भाई के प्रेम से जुड़ी अनमोल भावनाओं का पर्व है।

“पीयर हाऊ जाऊँगा…” — एक बहन की दिल से निकली पुकार।


लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics
लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

आयो आयो राखी को तिवार , पीयर हाऊ जाऊँगा
लय न जाऊंगा राखी को तार , पीयर हाऊ जाऊँगा

भैया भाभी न बड़ा प्रेम सी बुलायो
मम्मी पप्पा न भी फ़ोन लगायो
भाई बयानिया को बचपन को प्यार
पीयर हाऊ जाऊँगा ………

छोरी अकेली सब लाड लड़ाव
दादा दादी की भी यकद सताव
हो स्वामी सावन की आयी फुवार
पीयर हाऊ जाऊँगा ……….

नहीं मांगू लहंगो नहीं मागूंगा साडी
नहीं नवी पायल नहीं मांगूंगा बिछोड़ि
नहीं मांगूंगा सोना को हार
पीयर हाऊ जाऊँगा ……….

द्वापर म गोविन्द न राखी बांधडी
गायी ऋषिका न गरबि निमाड़ी
ओह म्हारो छोटो सो कुटुंब परिवार
पीयर हाऊ जाऊँगा ……….


लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics
लय न जाऊंगा राखी को तार 2026 lyrics

Ayo Ayo Rakhi Ko Tivar, Peer Hau Jaunga
Lay Na Jaunga Rakhi Ko Tar, Peer Hau Jaunga

Bhaiya Bhabhi Na Bada Prem Si Bulayo
Mummy Pappa Na Bhi Phone Lagayo
Bhai Baniyan Ko Bachpan Ko Pyar
Peer Hau Jaunga………

Chhori Akeli Sab Laad Ladav
Dada Dadi Ki Bhi Yad Satav
Ho Swami Sawan Ki Aayi Fuwar
Peer Hau Jaunga……….

Nahi Mangu Lehngo Nahi Mangunga Saadi
Nahi Navi Payal Nahi Mangunga Bichhodi
Nahi Mangunga Sona Ko Haar
Peer Hau Jaunga……….

Dwapar Ma Govind Na Rakhi Bandhdi
Gayi Rishika Na Garbi Nimadi
Oh Mharo Chhoto So Kutumb Parivar
Peer Hau Jaunga……….


गीत का भावार्थ

“आयो आयो राखी को तिवार, पीयर हाऊ जाऊँगा” एक भावनात्मक निमाड़ी लोकगीत है, जो राखी के पावन त्योहार पर एक बहन के मन में अपने पीयर यानी मायके जाने की खुशी, उत्सुकता और भावनाओं को बहुत ही सरल और सुंदर तरीके से प्रस्तुत करता है।

राखी का त्योहार आते ही बहन के मन में अपने मायके की यादें ताजा हो जाती हैं। उसे अपने भाई, भाभी, मम्मी-पापा, दादा-दादी और पूरे परिवार के साथ बिताया हुआ बचपन याद आने लगता है। उसके लिए राखी केवल भाई की कलाई पर राखी बाँधने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह अपने परिवार के साथ फिर से जुड़ने, बचपन की यादों को जीने और अपनों का प्यार पाने का अवसर है।

पहले अंतरे में बहन कहती है कि राखी का त्योहार आ गया है और अब वह अपने पीयर जाने वाली है। भाई और भाभी उसे बड़े प्रेम से बुलाते हैं। मम्मी-पापा भी फोन करके उसका हाल पूछते हैं और उसे घर आने के लिए कहते हैं। इन सबके बीच बहन को अपने भाई के साथ बिताया हुआ बचपन याद आता है। बचपन में भाई-बहन के बीच जो निश्छल प्रेम था, वही आज भी उसके दिल में मौजूद है।

दूसरे अंतरे में बहन के मायके जाने की खुशी और भी गहरी हो जाती है। वह कहती है कि घर की अकेली बेटी होने के कारण उसे परिवार के सभी लोगों से बहुत लाड़-प्यार मिला है। दादा-दादी का स्नेह और उनकी यादें भी उसे बहुत सताती हैं। सावन की फुहार और राखी का मौसम उसके मन में मायके जाने की इच्छा को और बढ़ा देता है। सावन, राखी और पीयर—तीनों मिलकर उसकी भावनाओं को और भी खूबसूरत बना देते हैं।

तीसरे अंतरे में गीत की सबसे खूबसूरत भावनाओं में से एक सामने आती है। बहन कहती है कि उसे मायके से कोई महंगा उपहार नहीं चाहिए।
उसे न लहंगा चाहिए, न साड़ी, न नई पायल और न ही सोने का हार। उसके लिए इन भौतिक चीजों से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है अपने भाई और परिवार का प्यार। वह केवल अपने पीयर जाना चाहती है, अपने लोगों से मिलना चाहती है और उनके साथ कुछ पल बिताना चाहती है।

यह अंतरा यह संदेश देता है कि भाई-बहन के रिश्ते की कीमत किसी उपहार या धन-दौलत से नहीं लगाई जा सकती। सच्चा प्रेम और अपनापन ही इस रिश्ते की सबसे बड़ी दौलत है।

अंतिम अंतरे में गीत को हमारी धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ा गया है। द्वापर युग में श्रीकृष्ण और राखी के प्रसंग का उल्लेख करते हुए गीतकार ने भाई-बहन के प्रेम की प्राचीन परंपरा को याद किया है। साथ ही निमाड़ी भाषा, निमाड़ी संस्कृति और छोटे से परिवार की आत्मीयता को भी गीत में स्थान दिया गया है।

इस प्रकार पूरा गीत एक बहन के मन की उस भावनात्मक यात्रा को दर्शाता है, जिसमें राखी का त्योहार आते ही उसके मन में अपने पीयर, भाई, माता-पिता, दादा-दादी और बचपन की यादें जीवंत हो जाती हैं।

 गीत का मुख्य संदेश

इस गीत का सबसे सुंदर संदेश यही है कि राखी का त्योहार महंगे उपहारों का नहीं, बल्कि रिश्तों के प्रेम और अपनापन का त्योहार है।

एक बहन को अपने भाई से सोने का हार या महंगे कपड़े नहीं चाहिए—उसे चाहिए तो बस अपने भाई का प्यार, परिवार का स्नेह और अपने पीयर की वो मिट्टी, जहाँ उसने अपना बचपन बिताया है।

“पीयर हाऊ जाऊँगा…” इस गीत की केवल एक पंक्ति नहीं, बल्कि हर उस बहन के दिल की आवाज है जो राखी के अवसर पर अपने मायके और अपने परिवार से मिलने के लिए भावुक हो उठती है। ❤️

यह निमाड़ी लोकगीत हमारी लोकभाषा, पारिवारिक संस्कारों, भाई-बहन के प्रेम और राखी की भावनात्मक परंपरा को एक साथ प्रस्तुत करता है। इसलिए यह गीत विशेष रूप से उन सभी बहनों और भाइयों के दिल को छू सकता है, जिनके लिए राखी का त्योहार रिश्तों की मिठास और बचपन की यादों का पर्व है।

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