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माई गंगा महाराणी अपणा घर आई निमाड़ी लोकभजन गंगा माता

माई गंगा महाराणी अपणा घर आई – निमाड़ी गंगा माता भजन Lyrics

माई गंगा महाराणी अपणा घर आई – निमाड़ी गंगा माता भजन Lyrics

माई गंगा महाराणी अपणा घर आई निमाड़ी लोकभजन गंगा माता
निमाड़ अंचल का प्रसिद्ध गंगा माता पर आधारित लोकभजन

🟡 Song Information

 

  • भजन का नाम: माई गंगा महाराणी अपणा घर आई

  • भजन प्रकार: निमाड़ी लोकभक्ति भजन (गंगा माता)

  • गीतकार / रचनाकार: पंकज परमार

  • गायक: गीतेश कुमार भार्गव

  • भाषा: निमाड़ी / हिंदी

  • विषय: माँ गंगा का आगमन, पवित्रता, लोकआस्था

  • क्षेत्र: निमाड़ अंचल (मध्य प्रदेश)


Short Description

यह निमाड़ी लोकभक्ति भजन माँ गंगा के पावन आगमन का भावपूर्ण वर्णन करता है। गीत में माँ गंगा को महाराणी के रूप में अपने भक्तों के घर पधारते हुए दर्शाया गया है, जहाँ उनका स्वागत मंगल गीतों, खुशियों और पवित्र नदियों के संगम के साथ किया जाता है। यह भजन निमाड़ की लोकआस्था और धार्मिक परंपरा को दर्शाता है।


🎵 Lyrics

 

माई गंगा महाराणी अपणा घर आई

घर आई रे, आँगन आयी रे, पावन आयी
माई गंगा महाराणी अपणा घर आई


1)

घर आँगन म खुशिया छाई
पान-फूल सी मण्डप छगवाई
हिल-मिल सखियाँ मंगल गाई – (2)
माई पावणी बुलाई

पाप हरणी माई, जग जननी माई
संग लायी…


2)

भागीरथी माई, यमुना आई
गोमती, गण्डकी संग म आई
तमसा जी आई, कोशी मैया आई
माई सोनभद्र आई – (2)

सप्त सिंधु को नीर
माई संग लायी…


3)

मैकाल इसी रेवाजी आई
बेदा-कुदा माई संग म आई
ताप्ति माँ आई, माई क्षिप्राजी आई
मन म हर्षायी

माई गंगा महाराणी
अपणा घर आई

Mai Ganga Maharani Apna Ghar Aayi – English 


Mai Ganga Maharani Apna Ghar Aayi

Ghar aayi re, aangan aayi re, pawan aayi
Mai Ganga Maharani apna ghar aayi


1)

Ghar aangan mein khushiyaan chhaayi
Paan-phool se mandap chhagwaayi
Hil-mil sakhiyan mangal gaayi – (2)
Mai paawani bulaayi

Paap harani mai, jag janani mai
Sang laayi…


2)

Bhagirathi mai, Yamuna aayi
Gomati, Gandaki sang mein aayi
Tamsa ji aayi, Koshi maiya aayi
Mai Sonbhadra aayi – (2)

Sapt Sindhu ko neer
Mai sang laayi…


3)

Maikal isi Rewaji aayi
Beda-kuda mai sang mein aayi
Tapti maa aayi, mai Kshipraji aayi
Man mein harshaayi

Mai Ganga Maharani
Apna ghar aayi

यह निमाड़ी लोकभजन माँ गंगा के पावन आगमन की खुशी और श्रद्धा को व्यक्त करता है। गीत में बताया गया है कि जब माँ गंगा घर-आँगन में पधारती हैं, तो चारों ओर मंगल, खुशी और पवित्रता का वातावरण बन जाता है। सखियाँ मंगल गीत गाती हैं और माँ को पापनाशिनी, जगजननी के रूप में स्मरण किया जाता है। भागीरथी, यमुना, गोमती, नर्मदा, ताप्ती जैसी पवित्र नदियों का उल्लेख कर माँ गंगा की व्यापक महिमा को दर्शाया गया है। यह भजन निमाड़ की आस्था, संस्कृति और लोकभक्ति की सुंदर झलक प्रस्तुत करता है।

“माई गंगा महाराणी अपणा घर आई” एक भावनात्मक और भक्तिपूर्ण निमाड़ी लोकभजन है, जो माँ गंगा के पावन आगमन और उनकी महिमा का गुणगान करता है। गीत की शुरुआत घर-आँगन में छाई खुशियों से होती है, जहाँ पान, फूल और मंडप सजे हैं तथा सखियाँ मंगल गीत गा रही हैं। यह दृश्य माँ गंगा के स्वागत का प्रतीक है।

भजन में माँ गंगा को पापनाशिनी, जगजननी और कल्याणकारी शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। दूसरे अंतरे में भागीरथी, यमुना, गोमती, गण्डकी, कोशी, सोनभद्र और सप्तसिंधु नदियों का उल्लेख मिलता है, जो यह दर्शाता है कि माँ गंगा के साथ समस्त पवित्र जलधाराएँ भी आती हैं। यह निमाड़ अंचल की धार्मिक मान्यताओं और लोककल्पना को उजागर करता है।

तीसरे अंतरे में नर्मदा (रेवाजी), ताप्ती और क्षिप्रा जैसी नदियों का आगमन बताया गया है, जिससे मन में हर्ष और श्रद्धा का भाव उत्पन्न होता है। गीत के शब्द सरल, लोकधुन से जुड़े हुए और भावनाओं से परिपूर्ण हैं।

यह भजन न केवल धार्मिक आस्था को मजबूत करता है, बल्कि निमाड़ी लोकसंस्कृति, लोकभाषा और पारंपरिक भक्ति परंपरा को भी जीवंत बनाता है। गायक गीतेश कुमार भार्गव की भावपूर्ण प्रस्तुति और पंकज परमार की सशक्त रचना इसे एक प्रभावशाली निमाड़ी भजन बनाती है।

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