निमाड़ी कलाकार

माई रेवा तू करण कुआरी

माई रेवा तू करण कुआरी | नर्मदा मैया की महिमा के 7 चमत्कारी बोल

 माई रेवा तू करण कुआरी | नर्मदा मैया की महिमा के 7 चमत्कारी बोल

माई रेवा तू करण कुआरी
माई रेवा तू करण कुआरी

निमाड़ी भक्ति गीत | नर्मदा माता भजन

नर्मदा मैया की महिमा, पवित्रता और करुणा को समर्पित यह निमाड़ी भजन श्रद्धा, आस्था और लोकभावना से परिपूर्ण है। गीत में माँ नर्मदा के अमरकंटक से अवतरण, उनके पावन जल और तटों की महिमा का सुंदर वर्णन किया गया है।


🎶 भजन : माई रेखा तू करण कुआरी

✍️ गीतकार: राजेश भाई रेवलिया
🎤 गायक: गीतेश कुमार भार्गव
📺 प्रसारण: Nimadi Kalakar Channel
🕉️ श्रेणी: निमाड़ी भक्ति गीत / नर्मदा माता भजन

माई रेवा तू करण कुआरी,
जग क तारण आई हो

थारा जल का सब बलिहारी,
पाप नसावन आई हो
ss

महिमा भारी पावन परम,
तट पर हो नित दान और धरम
साधु-संत थारा तट भारी,
धुनि राया रमाई हो
माई रेवा तू करण कुआरी,
जग क तारण आई हो

भूरा मगर पर हुयी असवारी,
स्वेत वसन मा तन पर धारी
माई शिव की लाड़ली प्यारी,
अमरकंटक सी आयी हो
थारा जल का सब बलिहारी,
पाप नसावन आई हो
ss

घाट-घाट प मंदिर थारा,
कल-कल बेहती अमृत धारा
रोगी काया तुभन सुधारी,
घर-घर खुशिया छायी हो
माई रेवा तू करण कुआरी,
जग क तारण आई हो

मुरली को माँ मंगल करणी,
जन-जन की माँ तुम दुख हरणी
राजेश आयो शरण तुम्हारी,
सबका मन हर्षायी हो
थारा जल का सब बलिहारी,
पाप नसावन आई हो
ss

🎶 Bhajan: Mai Reva Tu Karan Kuwari

✍️ Geetkar: Rajesh Bhai Revaliya
🎤 Gayak: Gitesh Kumar Bhargava
📺 Prasaran: Nimadi Kalakar Channel
🕉️ Shreni: Nimadi Bhakti Geet / Narmada Mata Bhajan


🪔 Bhajan Lyrics

Mai Reva tu karan kuwari,
jag ka taran aayi ho
thara jal ka sab balihari,
paap nasavan aayi ho ss

Mahima bhaari pavan param,
tat par ho nit daan aur dharam
sadhu sant thara tat bhaari,
dhuni raya ramaai ho
Mai Reva tu karan kuwari,
jag ka taran aayi ho

Bhoora magar par hui aswari,
swet vasan ma tan par dhaari
Mai Shiv ki laadli pyaari,
Amarkantak si aayi ho
thara jal ka sab balihari,
paap nasavan aayi ho ss

Ghaat ghaat pa mandir thara,
kal-kal behti amrit dhaara
rogi kaaya tubhan sudhaari,
ghar-ghar khushiya chhaayi ho
Mai Reva tu karan kuwari,
jag ka taran aayi ho

Murli ko maa mangal karni,
jan-jan ki maa tum dukh harni
Rajesh aayo sharan tumhaari,
sabka man harshayi ho
thara jal ka sab balihari,
paap nasavan aayi ho ss

🌺 भजन का विस्तृत भावार्थ (Detail Explanation)

**माई रेवा तू करण कुआरी,

जग क तारण आई हो
थारा जल का सब बलिहारी,
पाप नसावन आई हो**

इन पंक्तियों में माँ नर्मदा (रेवा माई) को “करण कुआरी” कहा गया है, जिसका अर्थ है कि वे स्वयंभू, शाश्वत और पवित्र हैं। कवि मानता है कि माँ रेवा संसार के उद्धार के लिए धरती पर आई हैं। उनके जल की महिमा इतनी महान है कि वह पापों का नाश करने वाला और आत्मा को शुद्ध करने वाला है। यहाँ माँ नर्मदा को केवल नदी नहीं, बल्कि पवित्र देवी के रूप में स्वीकार किया गया है।


**महिमा भारी पावन परम,

तट पर हो नित दान और धरम
साधु-संत थारा तट भारी,
धुनि राया रमाई हो**

इन पंक्तियों में माँ रेवा की महिमा को अत्यंत पावन और श्रेष्ठ बताया गया है। उनके तट पर प्रतिदिन दान, पुण्य और धर्म के कार्य होते हैं। साधु-संत उनके किनारे तपस्या, साधना और भक्ति में लीन रहते हैं। “धुनि राया रमाई” से तात्पर्य है कि माँ नर्मदा का तट आध्यात्मिक ऊर्जा से भरा हुआ है, जहाँ हर समय भक्ति और साधना का वातावरण बना रहता है।


**माई रेवा तू करण कुआरी,

जग क तारण आई हो**

यह पंक्ति भजन की मूल भावना को दोहराती है कि माँ रेवा संसार के कल्याण और मानव के उद्धार के लिए अवतरित हुई हैं। यह दोहराव माँ के प्रति श्रद्धा और विश्वास को और गहरा करता है।


**भूरा मगर पर हुयी असवारी,

स्वेत वसन मा तन पर धारी
माई शिव की लाड़ली प्यारी,
अमरकंटक सी आयी हो**

इन पंक्तियों में माँ नर्मदा के दिव्य स्वरूप का चित्रण किया गया है। उन्हें मगर (मगरमच्छ) पर सवार दिखाया गया है, जो उनकी शक्ति और निर्भयता का प्रतीक है। श्वेत वस्त्र उनकी पवित्रता और शांति को दर्शाते हैं। माँ रेवा को भगवान शिव की प्रिय पुत्री कहा गया है और अमरकंटक को उनका पावन उद्गम स्थल बताया गया है, जहाँ से वे धरती पर अवतरित हुईं।


**थारा जल का सब बलिहारी,

पाप नसावन आई हो**

यहाँ पुनः माँ नर्मदा के जल की महिमा का गुणगान है। कवि कहता है कि उनका जल पापों का नाश करता है और मनुष्य को आत्मिक शुद्धता प्रदान करता है। यह पंक्ति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था को दर्शाती है।


**घाट-घाट प मंदिर थारा,

कल-कल बेहती अमृत धारा
रोगी काया तुभन सुधारी,
घर-घर खुशिया छायी हो**

इन पंक्तियों में माँ नर्मदा के घाटों और मंदिरों का वर्णन है। हर घाट पर मंदिर हैं और माँ की अमृत समान धारा निरंतर बहती रहती है। उनका जल न केवल आत्मिक बल्कि शारीरिक रोगों को भी दूर करने वाला माना गया है। माँ की कृपा से घर-घर सुख, शांति और खुशहाली फैलती है।


**माई रेवा तू करण कुआरी,

जग क तारण आई हो**

यह दोहराव यह दर्शाता है कि माँ रेवा का मूल उद्देश्य जगत का कल्याण और भक्तों का उद्धार है।


**मुरली को माँ मंगल करणी,

जन-जन की माँ तुम दुख हरणी
राजेश आयो शरण तुम्हारी,
सबका मन हर्षायी हो**

इन अंतिम पंक्तियों में माँ नर्मदा को मंगल करने वाली और सभी के दुख हरने वाली कहा गया है। “राजेश आयो शरण तुम्हारी” के माध्यम से गीतकार स्वयं को माँ की शरण में समर्पित करता है। माँ की कृपा से सभी भक्तों का मन आनंद और हर्ष से भर जाता है।


🌼 सार भाव

यह भजन माँ नर्मदा को पाप नाशिनी, दुख हरणी, मोक्ष दायिनी और जगत की कल्याणकारी माता के रूप में प्रस्तुत करता है। इसमें भक्ति, श्रद्धा, पौराणिक आस्था और लोकभावनाओं का सुंदर संगम दिखाई देता है।

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