म्हारा सीयाराम बाबा, आसो काम करिगा – निमाड़ी भक्ति भजन लिरिक्स

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🎤 Singer (गायक): Gitesh Kumar Bhargava ( गीतेश कुमार भार्गव ) ✍️ Lyrics (लेखक): Mohan Yadav ( मोहन यादव )
🎶 Genre: Nimadi Bhakti Bhajan
🕉️ विषय: सियाराम बाबा की भक्ति और महिमा
🌸 भाव-वाक्य (Intro Quote)
“राम भक्ति म लवलीन रया, जरा नी खोट
ओजस्वी तेज चम-चम चमक, तन पर रही लंगोट।”
🌼 मुखड़ा
म्हारा सीयाराम बाबा, आसो काम करिगा – (2)
सारी दुनिया म अपणो नाम करिगा।
🌿 अंतरा 1
जीया सादो जीवन,
राख्यो भक्ति म मन – (2)
असा रोम-रोम क व अपणा राम करिगा सासी…
सारी दुनिया म अपणो नाम करिगा।
🌿 अंतरा 2
नाहीं कपड़ा को लोट,
राख तन प लंगोट – (2)
राम-राम रट जीवन विश्राम करिगा,
सारी दुनिया म अपणो नाम करिगा।
🌿 अंतरा 3
राखी भक्ति की शान,
समझया सबक समान – (2)
गाँव भट्याण क बैकुण्ठ धाम करिगा,
सारी दुनिया म अपणु नाम करिगा।
🌿 अंतरा 4
गीत मोहन को सार,
बाबा सुणजो पुकार – (2)
सबको कल्याण वो तो सुबह-शाम करिगा,
सारी दुनिया म अपणो नाम करिगा।
🔷 Mhara Siyaram Baba, Aaso Kaam Kariga
Nimadi Bhakti Bhajan – English (Roman) Lyrics
🎤 Singer: Gitesh Kumar Bhargava
✍️ Lyrics: Mohan Yadav
🌸 Intro Quote
“Ram bhakti mein lavleen raya, jara ni khot,
Ojasvi tej cham-cham chamak, tan par rahi langot.”
🌼 Chorus
Mhara Siyaram Baba, aaso kaam kariga – (2)
Saari duniya mein apno naam kariga.
🌿 Antara 1
Jiya saado jeevan,
Rakhyo bhakti mein man – (2)
Asa rom-rom ke va apna Ram kariga saansi…
Saari duniya mein apno naam kariga.
🌿 Antara 2
Naahin kapda ko lot,
Rakh tan par langot – (2)
Ram-Ram rat jeevan vishraam kariga,
Saari duniya mein apno naam kariga.
🌿 Antara 3
Raakhi bhakti ki shaan,
Samjhya sabak samaan – (2)
Gaav Bhatyaan ko Baikunth dhaam kariga,
Saari duniya mein apno naam kariga.
🌿 Antara 4
Geet Mohan ko saar,
Baba sunjo pukaar – (2)
Sabko kalyaan wo to subah-shaam kariga,
Saari duniya mein apno naam kariga.
🔶 भजन का संक्षिप्त भावार्थ (लगभग 200 शब्द)
यह निमाड़ी भक्ति भजन सियाराम बाबा के सादे, त्यागपूर्ण और राम-भक्ति से भरे जीवन को श्रद्धापूर्वक प्रस्तुत करता है। भजन में बाबा को ऐसा संत बताया गया है जिनका जीवन पूर्णतः ईश्वर-भक्ति में लीन रहा। उन्होंने न कोई दिखावा किया, न ही सांसारिक सुखों की इच्छा रखी। तन पर केवल लंगोट और मन में निरंतर राम नाम का जप—यही उनके तपस्वी जीवन का प्रतीक है।
गीत यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति बाहरी आडंबर से नहीं, बल्कि शुद्ध मन, सादगी और निरंतर स्मरण से होती है। बाबा ने अपने सरल आचरण और निष्काम सेवा से न केवल स्वयं का जीवन धन्य किया, बल्कि पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक प्रेरणा दी। भजन में यह भी दर्शाया गया है कि सियाराम बाबा ने अपने गाँव और आसपास के क्षेत्र को बैकुण्ठ समान पवित्र बना दिया।
गीतकार मोहन यादव के शब्दों में बाबा से करुणा और कल्याण की प्रार्थना की गई है—कि वे सुबह-शाम सबका भला करें। यह भजन श्रद्धालुओं के मन में विश्वास जगाता है कि सच्चे संत का नाम और कार्य संसार भर में फैलता है। कुल मिलाकर, यह भजन राम-भक्ति, त्याग, लोककल्याण और संत परंपरा का सुंदर प्रतीक है।
यह निमाड़ी भजन सियाराम बाबा के सरल जीवन, राम-भक्ति और लोककल्याण की भावना को दर्शाता है। बाबा का सादापन, लंगोट धारण करना और निरंतर राम नाम जप करना उनके वैराग्य और तपस्या का प्रतीक है। भजन यह संदेश देता है कि सच्ची भक्ति से व्यक्ति का नाम और यश संसार में फैलता है।


