निमाड़ी कलाकार

म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग 2.0

म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग 2.0 Lyrics – Powerful Nimadi Folk Song | Gitesh Kumar Bhargava

म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग 2.0 Lyrics – Nimadi Folk Song | Gitesh Kumar Bhargava

 

🌿 म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग 2.0

(Nimadi Folk Song | निमाड़ी लोकगीत)

म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग 2.0 Powerful Nimadi Folk Song

📌 Song Information


🎶 गीत के बोल (Lyrics)

 

प्यारो लग, न निरालो लग,
म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग।


1️⃣ पहला अंतरा

म्हारा निमाड़ म संत बोंदरू बाबा,
नवमी का दिन देखो चमत्कारी आभा।
काची कयरी को स्वाद न्यारो लग,
म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग।


2️⃣ दूसरा अंतरा

म्हारा निमाड़ म धुणी वाला दादा,
देश–विदेश म महिमा छे ज्यादा।
जिनका आश्रम म अखण्ड आव सगळो जग,
म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग।


3️⃣ तीसरा अंतरा

म्हारा निमाड़ म संत सीयाराम जी,
मुख सी राम जप, वो तो सुबह जी।
असा दर्शन क भक्तन की लाम लग,
म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग।


4️⃣ चौथा अंतरा

म्हारा निमाड़ म संत पूर्णानंद,
इन्द्र की टेकरी पर लगू झानंद।
गुरु पूर्णिमा पर जिनको मेलो लग,
म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग।

🌿 Mharo Nimad Mak Pyaro Lag – 2

Singer: Gitesh Kumar Bhargava


Pyaro lag, na niralo lag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


1️⃣ First Antara

Mhāra Nimād me Sant Bondaru Baba,
Navami ka din dekho chamatkari ābhā.
Kāchi kayri ko swād nyāro lag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


2️⃣ Second Antara

Mhāra Nimād me Dhuni Wala Dada,
Desh-videsh me mahimā chhe jyādā.
Jinka āshram me akhand āv saglo jag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


3️⃣ Third Antara

Mhāra Nimād me Sant Siyaram Ji,
Mukh se Ram jap, vo to subah ji.
Aisa darshan k bhaktan ki lāam lag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


4️⃣ Fourth Antara

Mhāra Nimād me Sant Purnānand,
Indra ki Tekri par lagu jhānand.
Guru Purnima par jinko melo lag,
Mharo Nimad mak pyaro lag.


📝 गीत का संक्षिप्त भावार्थ

यह गीत “म्हारो निमाड़ मक प्यारो लग” निमाड़ अंचल की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक पहचान को अत्यंत सरल और आत्मीय भाषा में प्रस्तुत करता है। पूरे गीत में कवि निमाड़ भूमि के प्रति अपने गहरे प्रेम और गर्व को बार-बार दोहराता है। “प्यारो लग, न निरालो लग” पंक्ति यह दर्शाती है कि निमाड़ केवल प्रिय ही नहीं, बल्कि सबसे अलग और विशिष्ट भी है।

पहले अंतरे में संत बोंदरू बाबा का उल्लेख है, जिनकी नवमी तिथि पर चमत्कारी आभा देखने को मिलती है। यह अंतरा निमाड़ की संत परंपरा और चमत्कारों में आस्था को प्रकट करता है। साथ ही काची कयरी के स्वाद का वर्णन निमाड़ की प्राकृतिक समृद्धि और स्थानीय जीवनशैली को उजागर करता है।

दूसरे अंतरे में धुणी वाले दादा की महिमा का गुणगान है, जिनकी ख्याति देश-विदेश तक फैली हुई है। उनका अखण्ड आश्रम सभी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र है। यह अंतरा निमाड़ की आध्यात्मिक शक्ति और विश्वव्यापी पहचान को दर्शाता है।

तीसरे अंतरे में संत सीयाराम जी का चित्रण है, जो सदा राम नाम का जाप करते हैं। उनके दर्शन के लिए भक्तों की लंबी कतारें लगना यह दिखाता है कि निमाड़ में भक्ति और श्रद्धा कितनी गहराई से रची-बसी है।

चौथे अंतरे में संत पूर्णानंद जी का उल्लेख है, जिनका स्थान इन्द्र की टेकरी पर स्थित है और गुरु पूर्णिमा पर वहां विशाल मेला लगता है। यह निमाड़ की धार्मिक परंपराओं और सामूहिक उत्सवों की भावना को दर्शाता है।

कुल मिलाकर यह गीत निमाड़ की धरती, उसके संतों, संस्कृति और भक्ति परंपरा का सजीव चित्र प्रस्तुत करता है, जिससे निमाड़ के प्रति प्रेम और गौरव की अनुभूति होती है।

यह गीत निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और प्राकृतिक सुंदरता का भावपूर्ण वर्णन करता है।
निमाड़ के संत, आश्रम, मेले, लोक-आस्था और स्वाद—सब मिलकर कवि के मन में अपने क्षेत्र के प्रति असीम प्रेम और गर्व उत्पन्न करते हैं।

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