निमाड़ी कलाकार

पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026

पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026

पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026

पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026
पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026

निमाड़ की समृद्ध लोकसंस्कृति और गणगौर पर्व की खुशियों को समर्पित सुंदर निमाड़ी गणगौर गीत “गऊर बाई पाती खेलण जाय” प्रस्तुत है। इस गीत में माता गऊर बाई के सखी-सहेलियों के साथ उत्साह और उमंग से पाती खेलने जाने का मनमोहक वर्णन किया गया है। इस मधुर गीत को अपनी सुरीली आवाज़ में गितेश कुमार भार्गव ने गाया है, जिसे निमाड़ी कलाकार चैनल पर प्रकाशित किया गया है। इस गीत के सुंदर बोल राजेश रेवलिया जी की कलम से रचे गए हैं।


पाती खेलण जाय

पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026
पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026

पाती खेलण क जाय गऊर बाई , पाती खेलण जाय
मैया लाल लाल चुनरी लेहराय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

सखी सहेली संग चली उमंग म
नाचती गावती मन रंगया रंग म
वो तो अम्बा क बन क जाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

सोलह श्रृंगार करि रमुआ चाली
माथा टीको कान म बाली
माँ क गाला म दुलारी सोहाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

आम अमराई छायी रूश्णायी
रानू रोयण संग साईट बाई आयी
मैया पाँव पैजनिया सोहाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

लाड़ा लाड़ी को खेल मंडायो
ढप ढोलक प गीत सुणायो
मैया राजेश कलम गुण गाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय


Pati Khelan Jay – Gangaur Geet 2026 

पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026
पाती खेलण जाय -Gangaur geet 2026

Pati khelan ka jay Gaur Bai, pati khelan jay
Maiya laal laal chunari lehray, Gaur Bai pati khelan jay

Sakhi saheli sang chali umang mein
Nachti gaavti man rangya rang mein
Wo to Amba ka ban ka jay, Gaur Bai pati khelan jay

Solah shringar kari ramua chali
Matha tiko kaan mein baali
Maa ka gala mein dulaari sohay, Gaur Bai pati khelan jay

Aam amarai chhayi roshnai
Ranu royan sang Sait Bai aayi
Maiya paav paijaniya sohay, Gaur Bai pati khelan jay

Lada laadi ko khel mandayo
Dhap dholak pe geet sunayo
Maiya Rajesh kalam gun gaay, Gaur Bai pati khelan jay


1. पाती खेलण क जाय गऊर बाई , पाती खेलण जाय

मैया लाल लाल चुनरी लेहराय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

भावार्थ :
इस पंक्ति में बताया गया है कि माता गऊर बाई (गौरी माता) उत्सव के समय पाती खेलने जा रही हैं। उनके सिर पर लाल रंग की सुंदर चुनरी लहरा रही है। लाल चुनरी सौभाग्य, प्रेम और सुहाग का प्रतीक मानी जाती है। पूरा वातावरण उत्सव और खुशी से भरा हुआ है।


2. सखी सहेली संग चली उमंग म

नाचती गावती मन रंगया रंग म
वो तो अम्बा क बन क जाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

भावार्थ :
इस भाग में माता गऊर बाई अपनी सखी-सहेलियों के साथ खुशी और उत्साह में पाती खेलने जा रही हैं। सब मिलकर नाचते-गाते जा रहे हैं। उनका मन खुशी के रंग में रंग गया है और वे अम्बा (देवी) के बगीचे / वन की ओर जा रही हैं जहाँ यह उत्सव मनाया जा रहा है।


3. सोलह श्रृंगार करि रमुआ चाली

माथा टीको कान म बाली
माँ क गाला म दुलारी सोहाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

भावार्थ :
यहाँ माता गऊर बाई के सोलह श्रृंगार का वर्णन किया गया है। उन्होंने माथे पर टीका, कानों में बालियाँ और गले में सुंदर आभूषण पहने हैं। वे दुल्हन की तरह सजी हुई बहुत सुंदर लग रही हैं और पाती खेलने के लिए प्रसन्न मन से जा रही हैं।


4. आम अमराई छायी रूश्णायी

रानू रोयण संग साईट बाई आयी
मैया पाँव पैजनिया सोहाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

भावार्थ :
इस अंतरे में प्रकृति का सुंदर दृश्य दिखाया गया है। आम के बागों में हरियाली और रोशनी छाई हुई है। कई सखियाँ जैसे रानू और साईट बाई भी साथ में आई हैं। माता के पैरों में पहनी हुई पायल (पैजनिया) बहुत सुंदर लग रही है और उसकी मधुर आवाज वातावरण को और भी आनंदमय बना रही है।


5. लाड़ा लाड़ी को खेल मंडायो

ढप ढोलक प गीत सुणायो
मैया राजेश कलम गुण गाय , गऊर बाई पाती खेलण जाय

भावार्थ :
इस भाग में उत्सव का पूरा माहौल दिखाया गया है। लाड़ा-लाड़ी (युवक-युवतियाँ) मिलकर खेल और उत्सव मना रहे हैं। ढप और ढोलक की थाप पर गीत गाए जा रहे हैं। अंत में गीतकार राजेश रेवलिया अपनी कलम से माता गऊर बाई की महिमा का गुणगान करते हैं।


समग्र भावार्थ :
यह निमाड़ी गणगौर गीत माता गौरी के सौंदर्य, सखी-सहेलियों के साथ उनके आनंद, प्रकृति की सुंदरता और गणगौर उत्सव की खुशी का सुंदर चित्र प्रस्तुत करता है। गीत में भक्ति, लोकपरंपरा और उत्सव का रंग एक साथ दिखाई देता है।

Scroll to Top