सिंगाजी जन्म लियो रे – Lyrics 2026

सिंगाजी जन्म लियो रे
सिंगाजी जन्म लियो रे गवलई जात म,,
पाया जन्म तिथि नवमी दीन बुधवार म,,
सूर्य उदय परभात म,,, सिंगाजी जन्म,,
चौक 1
मईनो वेशाख को भाई,, जन्म्या शुभ घडी म
कंडा छाबण माता, गवुर गई मड़ी म,,
हो आसा लग्या दायण का नी हाथ म,, अरे हाथ म
पाया जन्म तिथि नवमी दीन बुधवार म
चौक 2
जन्म समय का उपर,, हूतो कोई नी पास
जसो सव सूर्य को,, हुयो होय प्रकाश,,
हो जब जन्म हूयो रे कोई नी साथ म, कोई नी साथ म,
पाया जन्म तिथि नवमी दीन बुधवार म,
चौक 3
हुईरा आनंद मंगल, बाबा भिमा घर भाई
खुलिगा भाग हमारा, जात गवलई पाई
हो आसा आनंद मनईरा सबय रात म,, सबय रात म,
पाया जन्म तिथि नवमी दीन बुधवार म
चौक 4
बड़ा भाई लिंबा, बईण कृष्णा बाई
पिता भिमाजि था, माता गवूर बाई
हो गोलू गवलई लिख रे सतीश साथ म, सतीश साथ म,
पाया जन्म तिथि नवमी दीन बुधवार म
Singaji Janam Liyo Re

Singaji janam liyo re Gavalai jaat m,,
Paaya janam tithi Navami din Budhwar m,,
Surya uday parbhat m,,, Singaji janam,,
Chauk 1
Maino Veshakh ko bhai,, janmya shubh ghadi m
Kanda chhaaban mata, gavur gayi madi m,,
Ho aasa lagya dayaan ka ni haath m,, are haath m,,
Paaya janam tithi Navami din Budhwar m,,
Chauk 2
Janam samay ka upar,, huto koi ni paas
Jaso sav Surya ko,, huyo hoy prakash,,
Ho jab janam huyo re koi ni saath m, koi ni saath m,,
Paaya janam tithi Navami din Budhwar m,,
Chauk 3
Huira anand mangal, Baba Bhima ghar bhai
Khuliga bhaag hamara, jaat Gavalai paai
Ho aasa anand manaira sabay raat m,, sabay raat m,,
Paaya janam tithi Navami din Budhwar m,,
Chauk 4
Bada bhai Limba, bain Krishna Bai
Pita Bhimaji tha, mata Gawur Bai
Ho Golu Gavalai likh re Satish saath m, Satish saath m,
Paaya janam tithi Navami din Budhwar m,,,
भजन का अर्थ
मुखड़ा:
“सिंगाजी जन्म लियो रे गवलई जात म…”
→ इसमें बताया गया है कि सिंगाजी महाराज का जन्म गवली (गवलाई) जाति में हुआ। उनका जन्म नवमी तिथि, बुधवार और सूर्योदय के समय हुआ, जो बहुत ही शुभ माना जाता है।
चौक 1:
“मईनो वेशाख को भाई, जन्म्या शुभ घड़ी म…”
→ उनका जन्म वैशाख महीने में हुआ, जो धार्मिक रूप से पवित्र महीना माना जाता है।
→ माता (गवूर बाई) साधारण स्थिति में थीं (कंडा छाबण = गोबर के उपले बनाते समय), यानी बहुत साधारण और ग्रामीण माहौल में जन्म हुआ।
→ “दायण का नी हाथ म” का मतलब है कि उनके जन्म में किसी दाई (midwife) का हाथ नहीं था, यानी यह एक चमत्कारिक और ईश्वरीय घटना थी।
चौक 2:
“जन्म समय का उपर, हूतो कोई नी पास…”
→ जन्म के समय कोई भी आसपास नहीं था, यानी वे अकेले ही जन्मे।
→ लेकिन उस समय ऐसा प्रकाश फैला जैसे सूरज की रोशनी चारों ओर फैल गई हो।
→ यह उनके दिव्य और संत स्वरूप होने का संकेत है।
चौक 3:
“हुईरा आनंद मंगल, बाबा भिमा घर भाई…”
→ उनके जन्म के बाद उनके घर (पिता भिमा जी के घर) में बहुत खुशी और उत्सव मनाया गया।
→ गवली जाति को यह सौभाग्य मिला कि इतने महान संत का जन्म उनके समाज में हुआ।
→ पूरे गांव में रात भर आनंद और उत्सव का माहौल रहा।
चौक 4:
“बड़ा भाई लिंबा, बईण कृष्णा बाई…”
→ इसमें उनके परिवार का परिचय दिया गया है:
- बड़े भाई: लिम्बा
- बहन: कृष्णा बाई
- पिता: भिमाजी
- माता: गवूर बाई
→ अंत में कवि (गोलू गवलई / सतीश) अपना नाम जोड़कर बताता है कि यह भजन उसने रचा है।
सार :
यह भजन सिंगाजी महाराज के दिव्य जन्म, उनके परिवार, और उस समय के चमत्कारी माहौल को दर्शाता है।
इसमें यह संदेश भी है कि महान संत किसी बड़े या अमीर घर में नहीं, बल्कि साधारण परिवार में भी जन्म लेकर समाज को मार्ग दिखाते हैं।


