मेरे भोले पिया | Shiv Bhajan Lyrics
Singer: Gitesh Kumar Bhargava | Lyrics: Brajmohan Choukse
परिचय

“मेरे भोले पिया” एक भावपूर्ण निमाड़ी शिव-भजन है, जिसमें भोलेनाथ के प्रति भक्त की अनन्य लगन, श्रद्धा और समर्पण का सुंदर चित्रण मिलता है।
सरल शब्दों में रचा गया यह भजन शिव-भक्ति, करुणा और विश्वास की भावना को गहराई से प्रकट करता है।
🎼 Bhajan Credits
🎶 भजन: मेरे भोले पिया
✍️ गीतकार: ब्रजमोहन चौकसे
🎤 गायक: गीतेश कुमार भार्गव
📀 प्रकाशन: निमाड़ी कलाकार (Nimadi Kalakar)
🕉️ शैली: निमाड़ी / शिव भजन
📜 मेरे भोले पिया – Lyrics Shiv Bhajan
मुखड़ा
मेरे भोले पिया ……..
गाऊ रे गाऊ रे गाऊ रे,
मैं ती तेरा भजन,
तुमसे लागी लगन
मेरे भोले पिया……
1️⃣
छोड़ समाधी दर्श दिखादो,
क्यो रूठे हो ये तो बतादो
करूँ कोई जतन,
तुझमे होके मगन,
2️⃣
भोले शंकर ओ कैलाशी,
काट दो मेरी यम की फांसी
मैं तुम्हारी शरण,
तुमसे लागी लगन,
3️⃣
जब भक्तो ने तुम्हे पुकारा,
देर करी नहीं दिया सहारा
लागु तोरे चरण,
तुमसे लागी लगन,
4️⃣
जो भी तेरे दर पे आया,
मनचाहा फल तुमसे पाया
करो तारण-तरण,
तुमसे लागी लगन,
5️⃣
प्रेमी भोले का दिवाना,
उसने छोड़ा सारा जमाना
लाया श्रद्धा सुमन,
तुमसे लागी लगन,
Mere Bhole Piya

Mere bhole piya
Mere bhole piya……
Gaau re gaau re gaau re,
main ti tera bhajan,
tumse laagi lagan
mere bhole piya……
1)
Chhod samaadhi darsh dikhaado,
kyon roothe ho ye to bataado
karoon koi jatan,
tujhme hoke magan,
mere bhole piya……
2)
Bhole Shankar o Kailaashi,
kaat do meri Yam ki phaansi
main tumhaari sharan,
tumse laagi lagan,
mere bhole piya……
3)
Jab bhakton ne tumhe pukaara,
der kari nahin diya sahaara
laagun tore charan,
tumse laagi lagan,
mere bhole piya……
4)
Jo bhi tere dar pe aaya,
manchaaha phal tumse paaya
karo taaran-taran,
tumse laagi lagan,
mere bhole piya……
5)
Premi bhole ka deewaana,
usne chhoda saara zamaana
laaya shraddha suman,
tumse laagi lagan,
mere bhole piya……
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मुखड़ा
“मेरे भोले पिया… गाऊ रे गाऊ रे गाऊ रे”
यहाँ भक्त भोलेनाथ को पिया कहकर अत्यंत आत्मीय संबंध प्रकट करता है।
भक्त कहता है कि वह निरंतर शिव का भजन गाएगा, क्योंकि उसका मन पूरी तरह भगवान से जुड़ चुका है।
“तुमसे लागी लगन” दर्शाता है कि यह भक्ति स्वार्थरहित और स्थायी है।
1
“छोड़ समाधी दर्श दिखादो, क्यो रूठे हो ये तो बतादो”
यह पंक्तियाँ भक्त के विरह और व्याकुलता को दर्शाती हैं।
भगवान शिव ध्यानमग्न हैं, पर भक्त चाहता है कि वे उसकी ओर भी कृपा-दृष्टि करें।
वह पूछता है—क्या कोई भूल हो गई है? मैं कौन-सा उपाय करूँ कि आप प्रसन्न हों?
यहाँ समाधि ईश्वर की अलौकिक स्थिति का प्रतीक है और दर्शन करुणा का।
2
“भोले शंकर ओ कैलाशी, काट दो मेरी यम की फांसी”
यह पंक्ति शिव को मृत्युंजय रूप में स्मरण करती है।
भक्त उनसे जीवन के भय, पाप और मृत्यु के बंधन से मुक्ति माँगता है।
“मैं तुम्हारी शरण” कहकर वह पूर्ण समर्पण प्रकट करता है—
अब उसका सहारा केवल भोलेनाथ हैं।
3
“जब भक्तो ने तुम्हे पुकारा, देर करी नहीं दिया सहारा”
यह शिव की करुणा और भक्तवत्सलता का स्मरण है।
इतिहास और लोककथाओं में शिव ऐसे देव हैं जो अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते।
भक्त अपने अनुभव और विश्वास से कहता है कि महादेव ने सदैव पुकार सुनकर रक्षा की है।
4
“जो भी तेरे दर पे आया, मनचाहा फल तुमसे पाया”
यहाँ शिव को न्यायकारी और कृपालु देव के रूप में दर्शाया गया है।
जो भी सच्चे मन से शिव के द्वार आता है, उसकी कामना पूर्ण होती है।
“तारण-तरण” शब्द आत्मा के उद्धार और भवसागर से पार होने का संकेत देता है।
5
“प्रेमी भोले का दिवाना, उसने छोड़ा सारा जमाना”
यह पंक्तियाँ त्याग और वैराग्य का भाव प्रकट करती हैं।
सच्चा भक्त संसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर केवल शिव-प्रेम में लीन हो जाता है।
“श्रद्धा सुमन” यानी भक्त अपने हृदय के फूल शिव के चरणों में अर्पित करता है।
निष्कर्ष
“मेरे भोले पिया” भजन निमाड़ी लोक-भक्ति की आत्मा को दर्शाता है।
यह भजन सिखाता है कि सच्ची भक्ति में प्रश्न भी होते हैंविरह भी होता हैऔर अंततः पूर्ण समर्पण से ही शिव-कृपा प्राप्त होती है
यह केवल गीत नहीं, बल्कि एक भक्त और भगवान के बीच का संवाद है।




