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म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ,

म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ – Nimadi Bholenath Vivah Bhajan

म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ – Nimadi Bholenath Vivah Bhajan Lyrics 

म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ,

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🌸 म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ

(निमाड़ी लोक–हास्य भजन | भोलेनाथ विवाह गीत)

🎤 गायक: पंडित शैलेन्द्र जी शास्त्री
🎶 शैली: निमाड़ी लोक–हास्य भजन
🕉️ विषय: भगवान भोलेनाथ एवं माता पार्वती का विवाह

यह Nimadi Bholenath Vivah Bhajan भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह को
लोक-हास्य शैली में प्रस्तुत करता है।
गीत में शिवजी की सादगी, भूत-प्रेतों की बारात और नारद मुनि की भूमिका को
हँसी–मज़ाक के साथ दिखाया गया है, जो निमाड़ी लोकसंस्कृति की विशेष पहचान है।


📜 हिन्दी लिरिक्स

🔔 मुखड़ा

म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ,
कसो छे दुल्लव न कसी छे बारात।

नहीं एकी माय, नहीं एको बाप,
एका गला म बड़ा-बड़ा साँप।
द्वजा नारद का कयणा म आया म्हारा नाथ,
कसो छे दुल्लव न कसी छे बारात॥


🔸 अंतरा 1

एक गला म मण्डन की माला,
डांकणी-साकणी करी रही चाला।
भूत-प्रेतिल नक लायो संगात,
कसो छे दुल्लव न कसी छे बारात॥


🌍 English

Mhāri Pārvatī k dubai dī mhāro Nāth

 Song Information

🎤 Singer (गायक): Pandit Shailendra Shastri Ji
🎼 Genre: Nimadi Lok Hasya Bhajan
🕉️ Theme: Lord Shiva & Parvati Vivah
🌍 Region: Nimad (Madhya Pradesh)

🔔 Mukhda

Mhāri Pārvatī k dubai dī mhāro Nāth,
Kaso chhe dullav na kasī chhe bārāt.

Nahin eki māy, nahin eko bāp,
Ekā galā ma badā-badā sānp.
Dwajā Nārada kā kayanan ma āyo mhāro Nāth,
Kaso chhe dullav na kasī chhe bārāt.


🔸 Antara 1

Ek galā ma mandan kī mālā,
Dāṅkaṇī-sākaṇī karī rahī chālā.
Bhūt-pretal nak lāyo sangāt,
Kaso chhe dullav na kasī chhe bārāt.


🌿 गीत का लोक–भाव (संक्षेप में)

यह भजन भोलेनाथ के विवाह को निमाड़ी हास्य शैली में प्रस्तुत करता है।
यहाँ भोलेनाथ की सादगी, वैराग्य और अनोखी बारात को मज़ाकिया ढंग से दिखाया गया है—
जहाँ न माता-पिता, न शाही ठाठ, गले में साँप, साथ में भूत-प्रेत और नारद मुनि के कहने पर विवाह करने पहुँचे महादेव।

➡️ यही लोकगीत की खूबसूरती है—
भक्ति + हास्य + लोकसंस्कृति का संगम

🌿 गीत का विस्तृत भावार्थ (Detail Explanation in Hindi)

यह भजन भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती के विवाह को आधार बनाकर रचा गया एक निमाड़ी लोक–हास्य भजन है। इसमें भक्ति के साथ-साथ लोक जीवन की सरलता, व्यंग्य और हास्य का सुंदर समन्वय दिखाई देता है।

🔔 मुखड़े का भाव

“म्हारी पार्वती क डुबई दी म्हारा नाथ, कसो छे दुल्लव न कसी छे बारात”
यहाँ पार्वती की सखी या लोक-नारी भोलेनाथ की सादगी भरी बारात को देखकर आश्चर्य और हल्का मज़ाक करती है।
वह कहती है कि —

“हे भोलेनाथ! आपने मेरी पार्वती को तो ब्याह तो लिया, पर यह कैसी बारात है? न ठाठ है, न शान है।”

यह संवाद हास्य के माध्यम से पारंपरिक शाही विवाहों की तुलना भोलेनाथ के वैराग्यपूर्ण विवाह से करता है।


🕉️ माता-पिता और सामाजिक ढाँचे पर व्यंग्य

“नहीं एकी माय, नहीं एको बाप, एका गला म बड़ा-बड़ा साँप”
यह पंक्ति भोलेनाथ के अलौकिक स्वरूप को दर्शाती है।
वे न किसी सांसारिक कुल-गोत्र में बँधे हैं, न पारंपरिक सामाजिक नियमों में।

➡️ गले में साँप उनके काल पर विजय, निर्भयता और संयम का प्रतीक है।
लोक-कवि इसे सरल भाषा में रखकर श्रोताओं को हँसाते हुए गहरा अर्थ देता है।


🌸 नारद मुनि की भूमिका

“द्वजा नारद का कयणा म आया म्हारा नाथ”
यहाँ नारद मुनि को विवाह का सूत्रधार बताया गया है।
लोककथा के अनुसार नारद मुनि के सुझाव पर ही भोलेनाथ विवाह के लिए तैयार होते हैं।

➡️ यह दर्शाता है कि
ईश्वर भी लीला के माध्यम से समाज से जुड़ते हैं।


👻 बारात का हास्यपूर्ण वर्णन

“एक गला म मण्डन की माला, डांकणी-साकणी करी रही चाला
भूत-प्रेतिल नक लायो संगात”

यह भजन का सबसे हास्यप्रधान भाग है।

यहाँ भोलेनाथ की बारात में —

  • भूत

  • प्रेत

  • डाकिनी

  • शाकिनी

जैसे अलौकिक गणों का उल्लेख है।

➡️ लोकगीतकार इन्हें डरावना नहीं, बल्कि मस्ती और हँसी का कारण बनाकर प्रस्तुत करता है।
यह बताता है कि भोलेनाथ सबको स्वीकार करते हैं —
चाहे वह समाज के हाशिए पर खड़ा कोई भी क्यों न हो।


🌼 गूढ़ आध्यात्मिक संदेश

इस हास्य गीत के भीतर गहरे संदेश छिपे हैं:

✔️ 1. सच्चा विवाह दिखावे से नहीं, भाव से होता है

भोलेनाथ का विवाह बिना तामझाम, बिना शोर-शराबे के होता है।

✔️ 2. ईश्वर रूप, वेश और समाज से परे हैं

भूत-प्रेत, साँप, जटा—सब यह सिखाते हैं कि
ईश्वर सबको समान दृष्टि से देखते हैं।

✔️ 3. लोकभाषा में भक्ति सबसे प्रभावी होती है

निमाड़ी भाषा का प्रयोग इस गीत को आम जन से जोड़ता है।


🌺 निष्कर्ष

यह भजन केवल हास्य गीत नहीं है, बल्कि—

  • लोकसंस्कृति की जीवंत प्रस्तुति

  • भक्ति और व्यंग्य का अद्भुत मेल

  • निमाड़ की आत्मा को दर्शाने वाला लोकधरोहर गीत

है।

भोलेनाथ का यह विवाह गीत हमें सिखाता है कि

सादगी में ही सच्ची दिव्यता छिपी होती है।

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