निमाड़ी विवाह में सूर्योदय के 7 सौंदर्य गीत – Nimadi Lyrics
भूमिका
निमाड़ी लोक-संस्कृति में विवाह केवल एक सामाजिक संस्कार नहीं, बल्कि प्रकृति, परिवार, ईश्वर और समाज के सामूहिक उत्सव का रूप है। प्राचीन समय से निमाड़ अंचल में विवाह के अवसर पर गाए जाने वाले लोकगीत सूर्योदय के सौंदर्य, प्रभात की पवित्रता, गृह-आँगन की शोभा, दामाद के स्वागत, पत्नी–पति के स्नेह और विदाई की करुण भावनाओं को शब्द देते आए हैं।
इन गीतों में पहाड़ों के किनारे उगते सूर्य से लेकर मुर्गे की बाँग तक, और आँगन की सफ़ाई से लेकर गौ-दान तक—हर क्रिया को मंगल, पुण्य और जीवन-संस्कार के रूप में देखा गया है। यही कारण है कि निमाड़ी विवाह गीतों में प्रकृति और मनुष्य के बीच एक गहरा आत्मीय संबंध दिखाई देता है।
यहाँ प्रस्तुत गीत-रचनाएँ न केवल पारंपरिक लोक-धरोहर हैं, बल्कि वे उस समय की सामाजिक संरचना, धार्मिक आस्था और पारिवारिक मूल्यों का जीवंत दस्तावेज़ भी हैं। इन गीतों का भावार्थ शोधकर्ता गितेश कुमार भार्गव द्वारा अपनी लोक-सांस्कृतिक समझ, अध्ययन और बौद्धिक विवेचना के आधार पर किया गया है, जिससे इन प्राचीन पदों का अर्थ आज के पाठक के लिए भी स्पष्ट और सार्थक बन सके।
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निमाड़ी विवाह में सूर्योदय के 7 सौंदर्य गीत – जब पहाड़ो के किनारे सूर्योदय होता है

सुरीमल उंग्यों हो बयड़ा केरी कोर ,
सुरमिल उग्यो ॥
तुम तो जांगो हो अमुक भाई उमराव,
लेवो श्रीराम को नांब,
तुम तो करो हो गंगा-स्तान,
अब देवो ते गउआ को दान,
युरमिल उच्यो ॥।
संक्षिप्त व्याख्या
इस गीत में शुभ प्रभात और मंगल कार्यों की शुरुआत का वर्णन है। पूर्व दिशा से सुंदर सूर्य का उदय हुआ है, जो दिन की शुभता का संकेत देता है। घर के अमुक भाई उमराव को प्रेमपूर्वक जगाया जा रहा है और उनसे भगवान श्रीराम का नाम लेने, पवित्र स्नान करने तथा गऊदान करने का आग्रह किया गया है। यह सब कार्य विवाह जैसे शुभ अवसर पर पुण्य, शुद्धता और समृद्धि के प्रतीक माने गए हैं।
निमाड़ी विवाह में सूर्योदय के 7 सौंदर्य गीत – सूर्योदय का सौंदर्य

कुकू का वरणा सुरमिल उगियो ।
मोती का वरण अम्बों मौरियों ॥
अमुलडा री छाँह सिगासण जाई घड़जो ॥
सिगासण पर बठी बहु बालों खेलाव ॥
वंश बंध हो अमृक भाई को जी ॥
संक्षिप्त व्याख्या
इस गीत में घर के आँगन और विवाह-परिवार के शुभ वातावरण का वर्णन किया गया है।
“कुकू का वरणा” और “मोती का वरण” शुभता, सौंदर्य और समृद्धि के प्रतीक हैं। आम के पेड़ की छाया में सुंदर सिगासण (मंच/आसन) सजाया जाता है, जहाँ बहू बैठी है और बच्चों के साथ खेल रही है। यह दृश्य परिवार की खुशी, संतोष और वंश-वृद्धि को दर्शाता है। अंत में कहा गया है कि यह सब अमुक भाई के कुल की निरंतरता और मंगल भविष्य का संकेत है।
निमाड़ी विवाह में सूर्योदय के 7 सौंदर्य गीत – प्रभात: जिसकी शोभा वर्णी नहीं जाती

सुघड़ भयो परभात, सांवरो सुघड़ भयो परभात ।
तिरिया जो जागे न चीर सभाले,
मरद सभाले पाग,
जोगी जागे न जोग संभाले,
भोगी चांबे पान ।
ग्रह्मा जागे न वेद उच्चारे,
शोभा वरणी न जाये।
संक्षिप्त व्याख्या
इस गीत में सुंदर और मंगलमय प्रातःकाल का वर्णन है। सुबह होते ही स्त्री अपने वस्त्र सँभालती है, पुरुष अपनी पगड़ी ठीक करता है। योगी जागकर योग में लग जाता है और भोगी अपने भोग में। ब्रह्मा के जागने पर वेदों का उच्चारण होता है। यह दृश्य बताता है कि प्रभात का समय इतना पवित्र और शोभायमान है कि उसकी सुंदरता का पूरा वर्णन शब्दों में संभव नहीं है।
सुहावना सबेरा – निमाड़ी विवाह में सूर्योदय के 7 सौंदर्य गीत

तुम तो जागो न हो अ्रमुक भाई घर की नांर, विहाणो हो श्याम – सुहावणो ।
तुम तो जागों न हो बहुवर चीर संवारो, विहाणो हो श्याम सहांवणों ।
तुम तो देवो न हो बहुवर बाजुबन्द खील, विहाणो हो श्याम सुहावणों ।
तुम तो देवो न हो बहुबर कपिला गाय, विहाणो हो श्याम सुहावणों ।
शुक्र भान कुकड़ोसार बोल ,कोयल शब्द सुणाविया
कुकड़ा थारा ते बोल सब जागिया , जाग्या ते चारई देव
बोल वचन का रे कुकड़। !
इनी काशी का विश्वताथ जागिया, बद्री का बद्री – नाथ देव,
इनी अयोध्या का रामचन्द्र जागिया ,माधाता का ओकार देव
बोल वचन का रे कुकड़ा !
कुकड़ा थारा ते बोल सब जागिया,
जाग्या ते चारई भाई ।
इनी मजलस का मांठा भाई जागिया, कचेरी का छोटा भाई उमराव,
इनी स्कूल का मजला भाई जागिया , चेंडू खेलता नाना ताना बाला
बोल वचन का रे कुकड़ा ‘
कुकड़ा थारा ते बोल सब जागिया, जागी ते चारई सुहाय
निमाड़ी विवाह में सूर्योदय के 7 सौंदर्य गीत – मेरा आंगन सुहावना लग रहा है

आमुक जवाई आंगणो बुहारियो जी ,आमुक बैन न पुरिया चौक
म्हारो आंगणो सुहानो लग जी।
अमुक बैन स्वामीजी कह यौम कहे जी ,
स्वामी हमक पीयर पहुचावो ,
हमरा पीयर हल्दुली जी।
एक जावो न गौरी हम न वरजा ,
बेलड़ा घर आवजो
एक पेरणा चुनड़ी वधण गाठड़ी ,
चमकता घर आवजो
कुकू न भरी कचौला , तिलक करता आवाजों
एक बत्तीस पान को बिडलो ,
चाबता आवजो जी





