निमाड़ी कलाकार

परगणा निमाड़ म या मूर्ति महान छे

परगणा निमाड़ म या मूर्ति महान छे | Nimadi Lokgeet – Siyarambaba

परगणा निमाड़ म या मूर्ति महान छे | Nimadi Lokgeet – Siyarambaba

परगणा निमाड़ म या मूर्ति महान छे

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परगणा निमाड़ म या मूर्ति महान छे 

🎤 Singers / कलाकार

गायक / Singer: Umesh Bhai Prajapat
कोरस / Chorus: Kundan Yadav, Ravi Yadav
ढोलक / Dholak: Sagar Kumawat
ऑक्टोपेड / Octapad: Piyush Yadav
निर्माता, रिकॉर्डिस्ट और एडिटर / Producer, Recordist & Editor: Piyush Kushwah


 Location

स्थल / Location: Rewa Kinara, Gaon Narmada Bhatyan
Cultural Reference: Siyarambaba of Guna Gaon


📜 Lyrics

🔔 मुखड़ा

रेवा किनार गांव नर्मदा भट्याण छे.

सियाराम बाबा गुना गांव की पयछान छे
परगणा निमाड म या मूर्ति महान छे।

English Transliteration:
Reva kinar gav narmada bhatyan chhe
Siyaram Baba Guna Gaon ki paychaan che
Pargana Nimaad me ya murti mahaan che


🔸 अंतरा 1 / Verse 1

Nimadi:
तन पर लंगोटी जिनकी झरझरती काया,
मुख म राम राम जिनका दिल म समाया
सियाराम बाबा सारा संत न की शान छे,
परगणा निमाड म या मूर्ति महान छे

English Transliteration:
Tan par langoti jinki jharjharati kaaya,
Mukh me Ram Ram jinka dil me samaya
Siyaram Baba saara santan ki shaan che,
Pargana Nimaad me ya murti mahaan che


🔸 अंतरा 2 / Verse 2

Nimadi:
बाबा सुबह शाम कर नर्मदा की आरती
आसा संत जिनप गर्व कर मां भारती
लीला/महिमा महिमा जिनकी देखी न जनता हैराण छे.
परगणा निमाड म या मूर्ति महान छे

English Transliteration:
Baba subah shaam kar Narmada ki aarti
Aasa sant jinp garv kar Maa Bharti
Leela/mahima jin ki dekhi na janata hairaan che
Pargana Nimaad me ya murti mahaan che

नीचे प्रस्तुत निमाड़ी भक्ति-गीत “रेवा किनार गांव नर्मदा भट्याण छे” का एक विस्तृत, भावात्मक और सांस्कृतिक हिंदी व्याख्यान दिया जा रहा है। यह व्याख्या गीत की पंक्तियों, प्रतीकों, निमाड़ अंचल की लोकआस्था, संत-परंपरा, नर्मदा भक्ति और सियाराम बाबा (गुना गांव) के लोक-मानस में स्थापित आध्यात्मिक महत्व को समग्र रूप में समझाती है।


भूमिका : निमाड़, नर्मदा और संत-परंपरा

निमाड़ अंचल मध्यप्रदेश का वह क्षेत्र है जहाँ नर्मदा नदी केवल एक जलधारा नहीं, बल्कि मां, देवी, मोक्षदायिनी और जीवनदायिनी के रूप में पूजी जाती है। निमाड़ की संस्कृति, भाषा (निमाड़ी), लोकगीत, भजन, कथाएँ और पर्व—सबका केंद्र नर्मदा ही है। नर्मदा के किनारे बसे गांवों में संतों, साधुओं और तपस्वियों की परंपरा सदियों से रही है।

इसी परंपरा की एक उज्ज्वल कड़ी हैं सियाराम बाबा, जिनका संबंध गुना गांव से जोड़ा जाता है। यह गीत बाबा की साधना, सादगी, भक्ति और निमाड़ में उनकी पहचान को अत्यंत सरल लेकिन गहन भावों में प्रस्तुत करता है।


मुखड़ा (स्थायी) की व्याख्या

“रेवा किनार गांव नर्मदा भट्याण छे”

इस पंक्ति में ‘रेवा’ शब्द नर्मदा के लिए प्रयुक्त हुआ है। नर्मदा को रेवा कहकर पुकारना निमाड़ की आत्मीय परंपरा है।

  • रेवा किनार गांव — वह गांव जो नर्मदा के तट पर बसा है, जहां का जीवन नदी के साथ सांस लेता है।

  • नर्मदा भट्याण छे — अर्थात नर्मदा का पवित्र घाट, जहां पूजा, स्नान, ध्यान और आरती होती है।

यह पंक्ति वातावरण रचती है—एक ऐसा पवित्र स्थल, जहाँ संतों की साधना और लोक-आस्था एक साथ बहती है।


“सियाराम बाबा गुना गांव की पयछान छे”

यह पंक्ति बाबा को केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरे गांव की पहचान घोषित करती है।

  • बाबा का नाम आते ही गुना गांव स्मरण में आ जाता है।

  • उनका जीवन, उनका आचरण और उनकी साधना गांव के मान-सम्मान से जुड़ चुकी है।

यह लोकगीत यह संकेत देता है कि बाबा किसी पद, आश्रम या प्रचार से नहीं, बल्कि अपने जीवन से पहचान बने हैं।


“परगणा निमाड म या मूर्ति महान छे”

यह पंक्ति बाबा को निमाड़ परगने की महान मूर्ति कहती है।
यहां मूर्ति शब्द केवल पत्थर या प्रतिमा के लिए नहीं, बल्कि

  • जीवित आदर्श

  • चलता-फिरता धर्म

  • साकार भक्ति
    के अर्थ में प्रयुक्त है।

निमाड़ के जनमानस में बाबा एक ऐसी प्रेरक छवि हैं, जिनमें भक्ति, त्याग और मानवता का समावेश है।


अंतरा 1 की विस्तृत व्याख्या

“तन पर लंगोटी जिनकी झरझरती काया,”

यह पंक्ति बाबा की अत्यंत सादगी और वैराग्य को दर्शाती है।

  • लंगोटी — साधु जीवन का प्रतीक है, जिसमें त्याग, संयम और तप छिपा है।

  • झरझरती काया — यह शब्द बताता है कि बाबा ने शरीर की सजावट या सुख-सुविधा को कभी महत्व नहीं दिया।

यह देह-त्याग नहीं, बल्कि देह को साधन मानने की भावना है—जहां आत्मा का विकास ही लक्ष्य है।


“मुख म राम राम जिनका दिल म समाया”

यह पंक्ति बाबा की निरंतर राम-भक्ति को उजागर करती है।

  • बाबा का मुख हमेशा “राम-राम” से गूंजता है।

  • राम केवल जप नहीं, उनके हृदय में बसे हुए हैं।

यह निर्गुण और सगुण भक्ति का सुंदर संगम है—राम नाम जीवन की हर श्वास में रचा-बसा है।


“सियाराम बाबा सारा संत न की शान छे,”

इस पंक्ति में बाबा को केवल निमाड़ के नहीं, बल्कि सभी संतों की शान कहा गया है।

  • यह बाबा की विनम्रता, करुणा और संत-लक्षणों को दर्शाता है।

  • बाबा किसी एक पंथ, जाति या वर्ग तक सीमित नहीं हैं।

वे संत-परंपरा की मर्यादा को जीवित रखने वाले प्रतीक हैं।


“परगणा निमाड म या मूर्ति महान छे।”

अंतरा का समापन फिर उसी पंक्ति से होता है, जो यह दृढ़ करता है कि बाबा की महत्ता निमाड़ की आत्मा में बस चुकी है।


अंतरा 2 की विस्तृत व्याख्या

“बाबा सुबह शाम कर नर्मदा की आरती”

यह पंक्ति बाबा के नित्य कर्म और अनुशासन को दर्शाती है।

  • सुबह और शाम नर्मदा की आरती करना केवल धार्मिक कर्म नहीं,

  • बल्कि नदी के प्रति कृतज्ञता, सेवा और समर्पण है।

नर्मदा बाबा के लिए देवी हैं, मां हैं और गुरु भी।


“आसा संत जिनप गर्व कर मां भारती”

यह पंक्ति बाबा को भारत माता का गौरव बताती है।

  • बाबा जैसे संत देश की आत्मा को जीवित रखते हैं।

  • वे धर्म को दिखावे से नहीं, आचरण से जीते हैं।

ऐसे संत ही भारत की आध्यात्मिक पहचान हैं।


“लीला/महिमा जिनकी देखी न जनता हैराण छे.”

यह पंक्ति बाबा की अलौकिक महिमा की ओर संकेत करती है।

  • उनकी लीला चमत्कारों से अधिक मानव-कल्याण में दिखाई देती है।

  • जनता उनकी सरलता में छिपी गहराई देखकर चकित होती है।

यह चमत्कार नहीं, बल्कि साधना की शक्ति है।


“परगणा निमाड म या मूर्ति महान छे”

अंत में फिर वही पंक्ति—जो पूरे गीत का सार है।
बाबा निमाड़ की आत्मा में बसने वाली महान प्रेरणा हैं।


गीत का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व

यह गीत केवल किसी संत की प्रशंसा नहीं करता, बल्कि

  • निमाड़ की संत-परंपरा

  • नर्मदा भक्ति

  • सादगी और सेवा
    को एक सूत्र में बांधता है।

इसमें न कोई आडंबर है, न शोर—बस शांत, गहरी भक्ति है।


निष्कर्ष

“रेवा किनार गांव नर्मदा भट्याण छे” गीत निमाड़ की आत्मा का आईना है।
सियाराम बाबा के माध्यम से यह रचना हमें सिखाती है कि—

  • सच्ची भक्ति सरल होती है

  • सच्चा संत मौन में बोलता है

  • और सच्ची महानता दिखावे से नहीं, सेवा से आती है।

निमाड़ अंचल के लिए यह गीत आस्था, पहचान और गौरव का प्रतीक है।
यह आने वाली पीढ़ियों को संत-मूल्यों से जोड़ने वाला अमूल्य लोकधरोहर गीत है।

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