राखी को तार – निमाड़ी राखी लोकगीत

🪔 गीत परिचय
“राखी को तार” एक पारंपरिक निमाड़ी लोकगीत है, जो सावन माह में आने वाले रक्षाबंधन पर्व पर भाई-बहन के अटूट प्रेम, मायके की याद और लोकसंस्कृति की भावनाओं को अभिव्यक्त करता है। यह गीत निमाड़ अंचल की लोकभाषा और लोकजीवन की आत्मा को दर्शाता है।
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गायक – गीतेश कुमार भार्गव लेखक – राजेश रेवलिया
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🎵 गीत के बोल (Nimadi Lyrics)
मुखड़ा
सावन को महिनो आयो भरतार
वीरा के बांधण जाऊंगा
राखी के राखी को तार
अंतरा 1
पायलो तिवार साजन आयो जिरोती
घर अंगणा सब देवू लिपि पोती
इरपोस आवाज ऐना इतवार
वीरा के बांधण जाऊंगा
राखी को तार
अंतरा 2
इरपोस क लय न आव प्यारो भाई
इरपोस सजय न भेज प्यारी भोजाई
भाई बयण को प्यारो त्योहार
वीरा के बांधण जाऊंगा
राखी को तार
अंतरा 3
माई की ममता न बाप को दुलार
पियर म सबक अपणा बीरा को आधार
भाई बयण को जनम को प्यार
वीरा के बांधण जाऊंगा
राखी को तार
अंतरा 4
राजेश की कलम बोल गीत की जुबानी
भाई बयण की लिखी दी कहानी
मुरली बजैया की लीला अपार
वीरा के बांधण जाऊंगा
राखी को तार
🎵 Geet ke Bol (Nimadi Lyrics)
Mukhda
Saavan ko mahino aayo bhartaar,
Veera ke baandhan jaaunga,
Rakhi ke rakhi ko taar.
Antara 1
Paayalo tivaar saajan aayo jiroti,
Ghar angna sab devu lipi poti.
Irpos awaaz aena itvaar,
Veera ke baandhan jaaunga,
Rakhi ko taar.
Antara 2
Irpos k lay na aav pyaaro bhai,
Irpos sajay na bhej pyaari bhojaai.
Bhai-bayan ko pyaaro tyohaar,
Veera ke baandhan jaaunga,
Rakhi ko taar.
Antara 3
Maai ki mamta na baap ko dulaar,
Piyar ma sabak apna beera ko aadhaar.
Bhai-bayan ko janam ko pyaar,
Veera ke baandhan jaaunga,
Rakhi ko taar.
Antara 4
Raajesh ki kalam bol geet ki zubaani,
Bhai-bayan ki likhi di kahaani.
Murli bajaiya ki leela apaar,
Veera ke baandhan jaaunga,
Rakhi ko taar.
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Rakhi Lokgeet Nimadi
राखी को तार गीत
Nimadi Raksha Bandhan Song
भाई बहन लोकगीत
सावन के निमाड़ी गीत
🌼 गीत का भावार्थ
यह गीत बहन की उस भावना को दर्शाता है जिसमें सावन के आते ही वह अपने भाई के पास जाकर राखी बाँधने के लिए उत्साहित होती है।
राखी केवल एक धागा नहीं, बल्कि माँ-बाप के संस्कार, भाई-बहन का अटूट विश्वास, और जीवन भर का प्रेम है।
गीत में लोकजीवन की सादगी, पारिवारिक अपनापन और भारतीय संस्कृति की आत्मा झलकती है।
निमाड़ी राखी लोकगीत हिन्दी अर्थ
Rakhi Lokgeet Meaning in Hindi
राखी को तार गीत का भावार्थ
Nimadi Folk Song Hindi Translation
🎵 हिन्दी अनुवाद
मुखड़ा
राखी का धागा
सावन का महीना आ गया है, हे प्रिय
मैं अपने भाई के पास राखी बाँधने जाऊँगी
राखी का पवित्र धागा
अंतरा 1
शुभ तिथि आई, सजधज कर खुशी छा गई
घर-आँगन को सबने साफ़ कर सजा लिया
रक्षाबंधन की आवाज़ हर ओर गूँज रही है
मैं अपने भाई के पास राखी बाँधने जाऊँगी
राखी का पवित्र धागा
अंतरा 2
रक्षाबंधन बिना भाई के अच्छा नहीं लगता
रक्षाबंधन बिना भाभी के सजता नहीं
यह भाई-बहन का सबसे प्यारा त्योहार है
मैं अपने भाई के पास राखी बाँधने जाऊँगी
राखी का पवित्र धागा
अंतरा 3
माँ की ममता और पिता का दुलार
मायके में भाई ही सबका सहारा होता है
भाई-बहन का यह जन्म-जन्म का प्रेम है
मैं अपने भाई के पास राखी बाँधने जाऊँगी
राखी का पवित्र धागा
राखी को तार – हिन्दी विवरण
“राखी को तार” एक भावपूर्ण निमाड़ी लोकगीत है, जो रक्षाबंधन के पावन पर्व पर भाई-बहन के अटूट प्रेम और पारिवारिक संस्कारों को अभिव्यक्त करता है। यह गीत सावन माह की हरियाली, उमंग और मायके की स्मृतियों से जुड़ी भावनाओं को सरल लोकभाषा में प्रस्तुत करता है।
गीत की शुरुआत राखी के पवित्र धागे से होती है, जो केवल एक रस्म नहीं बल्कि भाई-बहन के विश्वास, सुरक्षा और आजीवन स्नेह का प्रतीक है। सावन के आते ही बहन के मन में भाई से मिलने और उसकी कलाई पर राखी बाँधने की उत्कंठा जाग उठती है।
गीत के अंतरों में घर-आँगन की साफ-सफाई, उत्सव का माहौल और रक्षाबंधन की पुकार सुनाई देती है, जो बताती है कि यह त्योहार पूरे परिवार के लिए कितना महत्वपूर्ण है। बहन के लिए भाई केवल एक रिश्तेदार नहीं, बल्कि मायके का सहारा, माँ-बाप के प्रेम का प्रतिबिंब और जीवन भर का विश्वास होता है।
गीत में यह भाव भी उभरकर आता है कि रक्षाबंधन बिना भाई-बहन के अधूरा है। भाभी, परिवार और सामाजिक रिश्तों की उपस्थिति से यह पर्व और अधिक सुंदर बन जाता है। माँ की ममता, पिता का दुलार और भाई-बहन का जन्म-जन्म का रिश्ता इस लोकगीत को गहराई प्रदान करता है।
अंतिम अंतरे में गीतकार अपनी लेखनी के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते की कथा को शब्द देता है और इसे भारतीय संस्कृति व भगवान कृष्ण की लीलाओं से जोड़कर आध्यात्मिक ऊँचाई प्रदान करता है।
कुल मिलाकर, “राखी को तार” केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि निमाड़ अंचल की सांस्कृतिक विरासत, पारिवारिक मूल्यों और रक्षाबंधन की आत्मा को दर्शाने वाला भावनात्मक दस्तावेज़ है।


