संक्रांति को त्योहार आय गयो रे – निमाड़ी मकर संक्रांति गीत लिरिक्स | Gitesh Kumar Bhargava

🎤 Singer (गायक): Gitesh Kumar Bhargava
✍️ Lyrics (लेखक): Rajesh Revaliya (राजेश रेवलिया)
🎶 Genre: Nimadi Folk Song / Festival Song
🎉 अवसर: मकर संक्रांति पर्व
🔷 संक्रांति को त्योहार आय गयो रे
मकर संक्रांति विशेष निमाड़ी लोकगीत लिरिक्स
🌸 प्रस्तावना / भाव-वाक्य
“दान करा कुछ पुण्य कमावा, आई गई बसंत बहार।
पतंग उड़ावा, तिल-गुड़ खावा, आयो संक्रांति को त्योहार।”
🌼 मुखड़ा (Chorus)
आई गयो, आई गयो रे – (2)
संक्रांति को त्योहार आय गयो रे।
आनंद वधावा, मंगल गावा,
मन क भाय गयो रे,
संक्रांति को त्योहार आय गयो रे।
🌿 अंतरा 1
शनि सी मील न सूर्य देव आया,
धरती प भागीरथ गंगा लाया।
मोक्ष दिलाई गयो रे…
संक्रांति को त्योहार आय गयो रे।
🌿 अंतरा 2
भीष्म न अपणा प्राण जो त्याग्या,
उत्तरायण म सबका भाग जाग्या।
मकर राशि प छाई गयो रे…
संक्रांति को त्योहार आय गयो रे।
🌿 अंतरा 3
गोरखनाथ जी न खिचड़ो बणायो,
जीत को उत्सव सबन मनायो।
खिचड़ा को नाव धरय गयो रे…
संक्रांति को त्योहार आय गयो रे।
🌿 अंतरा 4
पावन पर्व यो हम सब मनावा,
दान-धर्म को पुण्य कमावा।
गीत राजेश को गाय गयो रे…
संक्रांति को त्योहार आय गयो रे।
🔷 Sankranti Ko Tyohar Aay Gayo Re
Nimadi Makar Sankranti Folk Song – English (Roman Lyrics)
🎤 Singer: Gitesh Kumar Bhargava
✍️ Lyrics: Rajesh Revaliya
🌸 Intro Quote
“Daan kara kuch punya kamaava,
Aai gayi basant bahaar.
Patang udaava, til-gud khaava,
Aayo Sankranti ko tyohar.”
🌼 Chorus
Aai gayo, aai gayo re – (2)
Sankranti ko tyohar aay gayo re.
Aanand vadhaava, mangal gaava,
Man ka bhaay gayo re,
Sankranti ko tyohar aay gayo re.
🌿 Antara 1
Shani si mil na Surya Dev aaya,
Dharti par Bhagirath Ganga laaya.
Moksh dilaai gayo re…
Sankranti ko tyohar aay gayo re.
🌿 Antara 2
Bhishma ne apna praan jo tyaagya,
Uttarayan mein sabka bhaag jaagya.
Makar raashi par chhaai gayo re…
Sankranti ko tyohar aay gayo re.
🌿 Antara 3
Gorakhnath ji ne khichdo banaayo,
Jeet ko utsav saban manaayo.
Khichda ko naav dharay gayo re…
Sankranti ko tyohar aay gayo re.
🌿 Antara 4
Paavan parv yo hum sab manaava,
Daan-dharam ko punya kamaava.
Geet Rajesh ko gaay gayo re…
Sankranti ko tyohar aay gayo re.
🔶 गीत का भाव (Short Note )
यह निमाड़ी लोकगीत मकर संक्रांति के पावन पर्व की खुशी, धार्मिक मान्यताओं और लोक परंपराओं को उजागर करता है। सूर्य के उत्तरायण होने, दान-पुण्य, तिल-गुड़, पतंग उड़ाने और खिचड़ी पर्व जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों को गीत में सुंदर रूप से पिरोया गया है।
🔶 गीत का विस्तृत भावार्थ / हिन्दी व्याख्या
निमाड़ी लोकगीत “संक्रांति को त्योहार आय गयो रे” मकर संक्रांति के पावन पर्व की धार्मिक, सांस्कृतिक और लोक-परंपरागत महत्ता को अत्यंत सरल और भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करता है। यह गीत केवल एक उत्सव का वर्णन नहीं करता, बल्कि भारतीय सनातन परंपरा से जुड़े गहरे आध्यात्मिक अर्थों को भी उजागर करता है।
गीत की शुरुआत दान-पुण्य, बसंत ऋतु के आगमन और पतंग उड़ाने जैसी लोक-खुशियों से होती है। तिल-गुड़ खाने की परंपरा आपसी मधुरता और प्रेम का प्रतीक है, जो समाज में एकता और सौहार्द का संदेश देती है। मुखड़े में बार-बार दोहराया गया “आई गयो रे संक्रांति को त्योहार” पूरे समाज के उल्लास और आनंद को दर्शाता है।
पहले अंतरे में सूर्य देव के उत्तरायण होने और भागीरथ द्वारा गंगा के पृथ्वी पर अवतरण का उल्लेख है, जो मोक्ष और पुण्य का संकेत देता है। दूसरे अंतरे में भीष्म पितामह द्वारा उत्तरायण में देह त्याग करने की कथा के माध्यम से इस तिथि के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया गया है। मकर राशि में सूर्य के प्रवेश को शुभ फलदायी बताया गया है।
तीसरे अंतरे में गोरखनाथ जी और खिचड़ी पर्व का उल्लेख लोक आस्था और विजय उत्सव को दर्शाता है। अंतिम अंतरे में दान-धर्म और पुण्य कमाने की प्रेरणा दी गई है, जिससे यह गीत समाज को सत्कर्म और धार्मिक आचरण की ओर प्रेरित करता है।
कुल मिलाकर, यह निमाड़ी गीत मकर संक्रांति के उल्लास, भक्ति, लोक संस्कृति और सनातन परंपरा का सुंदर संगम है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोक जीवन को जोड़ता है।
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