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संत सिंगाजी म्हारा घर आया | निमाड़ी गरबी गीत | Sant Singaji Maharaj Nimadi Lokgeet
संत सिंगाजी म्हारा घर आया
निमाड़ी पारंपरिक गरबी गीत
🎤 स्वर: गितेश कुमार भार्गव ( Gitesh kumar bhargava )
✍️ गीतकार: राजेश भाई रेवाळिया
🎶 शैली: निमाड़ी लोकशैली
📜 भूमिका
मध्यप्रदेश के निमाड़ अंचल में संत शिरोमणि श्री सिंगाजी महाराज लोकआस्था के महान केंद्र हैं।
यह निमाड़ी गरबी गीत संत सिंगाजी की महिमा, भक्ति, करुणा और चमत्कारिक व्यक्तित्व को लोकभावना के साथ प्रस्तुत करता है।
गरबी शैली में गाया गया यह गीत श्रद्धालुओं के घर-घर गूँजता है।
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🎶 गीत की मूल Lyrics
🎵 मुखड़ा
संत सिंगाजी म्हारा घर आया
मन भाया रे आनंद छाया, संत सिंगाजी म्हारा घर आया
जिनकी भक्ति की जगन देखी माया, संत सिंगाजी म्हारा घर आया
🎵 अंतरा 1
गाँव खजूरी न गवळ्य परिवार,
गौर बाई माता पिता भीमा जी का द्वार।
भोर ही त सी जिन न जनम पाया,
संत सिंगाजी म्हारा घर आया
🎵 अंतरा 2
स्वर्ग लोक सी श्रृंगी ऋषी आया,
कलियुग म संत सिंगाजी कवाया।
जण-जण का हिरदा म संत समाया,
संत सिंगाजी म्हारा घर आया
🎵 अंतरा 3
संत सिंगाजी की महिमा छे भारी,
मान मांगण क आवे नर-नारी।
ब्रह्म स्वरूप समस्त पूजाया,
संत सिंगाजी म्हारा घर आया
🎵 अंतरा 4
दास मुरली भी चरण अनुरागी,
भक्ति को दान वर रयो तुमसी मांगी।
सिंगा शरण गीत राजेश गाया,
संत सिंगाजी म्हारा घर आया
🎶 Geet Ki Lyrics (English )
🎵 Mukhda
Sant Singaji mhara ghar aaya,
Man bhaaya re aanand chhaaya, Sant Singaji mhara ghar aaya.
Jinki bhakti ki jag ne dekhi maaya,
Sant Singaji mhara ghar aaya.
🎵 Antara 1
Gaav Khajuri na gavalya parivaar,
Gaur Bai maata, pita Bhima Ji ka dwaar.
Bhor hi te si jinh ne janam paaya,
Sant Singaji mhara ghar aaya.
🎵 Antara 2
Swarg lok si Shringi Rishi aaya,
Kaliyug ma Sant Singaji kavaaya.
Jan-jan ka hirda ma sant samaaya,
Sant Singaji mhara ghar aaya.
🎵 Antara 3
Sant Singaji ki mahima chhe bhaari,
Maan maangan k aave nar-naari.
Brahm swaroop samast poojaaya,
Sant Singaji mhara ghar aaya.
🎵 Antara 4
Daas Murli bhi charan anuraagi,
Bhakti ko daan var rayo tumsi maangi.
Singa sharan geet Rajesh gaaya,
Sant Singaji mhara ghar aaya.
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🌿 गीत की समग्र व्याख्या
यह गीत निमाड़ अंचल के लोकदेवता संत सिंगाजी महाराज की भक्ति, महिमा और करुणा को दर्शाता है।
गरबी शैली में रचा गया यह गीत यह भाव प्रकट करता है कि जब संत सिंगाजी किसी भक्त के जीवन या घर में आते हैं, तो वहाँ आनंद, शांति और ईश्वरीय कृपा स्वतः फैल जाती है।
🎵 मुखड़े का भावार्थ
“संत सिंगाजी म्हारा घर आया”
यह पंक्ति प्रतीकात्मक है।
यह केवल शारीरिक आगमन नहीं, बल्कि संत की कृपा, स्मरण और भक्ति का घर में प्रवेश है।
मन भाया रे आनंद छाया –
संत के आगमन से मन आनंदित हो जाता है।जिनकी भक्ति की जगन देखी माया –
सिंगाजी महाराज की भक्ति इतनी प्रभावशाली है कि संसार भी उसकी शक्ति को पहचानता है।
➡️ संदेश:
जहाँ संत सिंगाजी का नाम लिया जाता है, वहाँ दुःख दूर होकर आनंद छा जाता है।
1
यह अंतरा संत सिंगाजी महाराज के जन्म और मूल परिचय को बताता है।
उनका जन्म निमाड़ क्षेत्र के खजूरी गाँव में हुआ।
वे एक सामान्य ग्वाले परिवार में जन्मे।
माता गौर बाई और पिता भीमा जी का उल्लेख संत की सादगी और लोकजीवन से जुड़ाव दिखाता है।
“भोर ही त सी जिन न जनम पाया”
→ उनका जन्म शुभ घड़ी में हुआ, जो उनके दिव्य स्वरूप का संकेत है।
➡️ संदेश:
महान संत साधारण परिवार में भी जन्म लेकर समाज का मार्गदर्शन कर सकते हैं।
2
यह अंतरा संत सिंगाजी महाराज के दिव्य अवतार स्वरूप को प्रकट करता है।
उन्हें श्रृंगी ऋषि का अवतार माना जाता है।
कलियुग में उन्होंने संत रूप धारण किया।
वे हर भक्त के हृदय में बस जाते हैं।
➡️ संदेश:
सच्चा संत जाति, वर्ग या स्थान नहीं देखता—वह हर हृदय में निवास करता है।
3
यह अंतरा संत सिंगाजी की महिमा और लोकआस्था को दर्शाता है।
उनकी महिमा अपरंपार है।
नर-नारी सभी अपनी मनोकामनाएँ लेकर उनके द्वार आते हैं।
उन्हें ब्रह्मस्वरूप मानकर पूजा जाता है।
➡️ संदेश:
संत सिंगाजी केवल लोकदेवता नहीं, बल्कि ईश्वरीय चेतना के प्रतीक हैं।
4
यह अंतरा दास-भाव और शरणागति का प्रतीक है।
“दास मुरली” स्वयं को संत का सेवक मानता है।
वह सिंगाजी से केवल भक्ति का दान माँगता है।
गीतकार और गायक संत की शरण में रहकर उनका गुणगान करते हैं।
➡️ संदेश:
सच्ची भक्ति में दिखावा नहीं, केवल समर्पण होता है।
🌼 गीत का मूल संदेश
संत सिंगाजी महाराज निमाड़ की आत्मा हैं
उनकी भक्ति से घर-घर में आनंद आता है
वे गरीब-अमीर, नर-नारी सभी के रक्षक हैं
सच्ची श्रद्धा से की गई भक्ति कभी निष्फल नहीं जाती
🪔 निष्कर्ष
“संत सिंगाजी म्हारा घर आया”
केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि—
✔ निमाड़ की लोकभक्ति परंपरा
✔ संत जीवन का आदर्श
✔ जन-जन की आस्था
✔ और संस्कृति की जीवंत धरोहर
का सुंदर संगम है।
🌸 गीत का भावार्थ
यह गरबी गीत बताता है कि—
संत सिंगाजी का जन्म निमाड़ के खजूरी गाँव में हुआ
वे श्रृंगी ऋषि के अवतार माने जाते हैं
उनकी भक्ति और महिमा से हर भक्त का हृदय आनंदित होता है
वे नर-नारी सभी की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं
संत सिंगाजी को ब्रह्मस्वरूप मानकर पूजा जाता है
गीत का भाव यह है कि
👉 जहाँ संत सिंगाजी का स्मरण होता है, वहाँ आनंद और शांति स्वयं चली आती है।
🪔 सांस्कृतिक महत्व
यह गीत गरबी, भजन और मेले में गाया जाता है
निमाड़ अंचल में संत सिंगाजी लोकदेवता के रूप में पूज्य हैं
यह गीत लोकभक्ति, श्रद्धा और परंपरा का जीवंत उदाहरण है



