श्री लता जी पर आधारित निमाड़ी कविता | Rajesh Bhai Revaliya

“भारत की आन बान लता दीदी शान रे”
भारत की स्वर-कोकिला लता मंगेशकर जी पर आधारित यह निमाड़ी कविता कवि राजेश भाई रेवाळिया द्वारा रचित एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि है। यह रचना नारी सम्मान, भारतीय संस्कृति और संगीत साधना की ऊँचाइयों को निमाड़ी लोक-भाव में अभिव्यक्त करती है।
श्री लता जी पर आधारित निमाड़ी कविता
📜 मूल कविता
भारत की आन बान लता दीदी शान रे।
नारी जाति को जेन ऊँचों करयो मान रे।
जैका प गर्व कर, सारो हिन्दुस्तान रे।
(1)
पिता दीनानाथ जी, माता सेवंतिबाई,
मराठी परिवार म, जनमी लता ताई।
इंदौर की बेटी वा तो, विश्व म छाई,
रंगमंच सी आपनी, पहचान बनाई।
पाँच साल की जैकी थी, उमर नादान रे,
पिता जी सी मिल्यो गायन कला को ज्ञान रे।
जैका प गर्व कर, सारो हिन्दुस्तान रे।
भारत की आन बान लता दीदी शान रे।
(2)
छत्तीस भाषा म जेन, गीत गुनगुनाया,
फिल्म जगत म गीत, अनगिनत गाया।
मधुर आवाज कंठ, कोकिला पाया,
सरस्वती माँ की रहें, सदा छत्रछाया।
कोकिला स्वर गूँज्यो, जग म मधुर गान रे,
दुनिया म रोशन करी, आपनी पहचान रे।
जैका प गर्व कर, सारो हिन्दुस्तान रे।
भारत की आन बान लता दीदी शान रे।
(3)
राष्ट्रीय पुरस्कार वा, भारतरत्न कहाई,
अनमोल आवाज विश्व, वादी म गुँजाई।
सकल विश्व का हिरदे, लता जी समाई,
तेरह साल की उमर म, पयलो गानों दियो गाई।
पयलो पद्मभूषण मिल्यो, लता जी क सम्मान रे,
भक्ति भाव पद को मुख सी, करयो बखान रे।
जैका प गर्व कर, सारो हिन्दुस्तान रे।
भारत की आन बान लता दीदी शान रे।
(4)
छे फरवरी का दिन, दुख पड़्यो भारी,
बिन कोयल सूनी हुई, बगिया हमारी।
लता जी याद म रोवे, दुनिया सारी,
ब्रह्मलीन स्वर्ग, लता जी सिधारी।
राजेश मुरली कहे, लता अमर हुई महान रे,
लता जी की गाथा को विश्व करे गुणगान रे।
जैका प गर्व कर, सारो हिन्दुस्तान रे।
भारत की आन बान लता दीदी शान रे।
कविता का भावार्थ
यह कविता लता मंगेशकर जी को भारत की आन-बान-शान बताती है। उनके जन्म, संघर्ष, संगीत साधना, विश्वव्यापी सम्मान और देहावसान तक की यात्रा को निमाड़ी लोकछंद में सजीव किया गया है। यह रचना बताती है कि लता जी केवल गायिका नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक आत्मा थीं।
1️⃣ कविता का शुद्ध हिन्दी अनुवाद
🔸 मुखड़ा
लता दीदी भारत की आन, बान और शान हैं।
उन्होंने नारी समाज का सम्मान ऊँचा किया है।
जिन पर पूरे हिंदुस्तान को गर्व है।
🔸 (1) खंड – अनुवाद
पिता दीनानाथ जी और माता सेवंतिबाई के घर,
मराठी परिवार में लता ताई का जन्म हुआ।
इंदौर की यह बेटी पूरे विश्व में छा गई,
और रंगमंच से ही उसने अपनी पहचान बनाई।
जब वह मात्र पाँच वर्ष की थीं, उम्र बहुत छोटी थी,
तभी पिता से उन्हें गायन कला का ज्ञान मिला।
जिन पर पूरे हिंदुस्तान को गर्व है।
लता दीदी भारत की आन, बान और शान हैं।
🔸 (2) खंड – अनुवाद
उन्होंने छत्तीस भाषाओं में गीत गुनगुनाए,
फिल्म जगत में असंख्य गीत गाए।
उनकी मधुर आवाज़ को ‘कोकिला’ की उपाधि मिली,
और सरस्वती माँ की कृपा सदा उन पर रही।
उनका कोकिला-सा स्वर पूरे संसार में गूँजा,
दुनिया भर में उन्होंने अपनी पहचान रोशन की।
जिन पर पूरे हिंदुस्तान को गर्व है।
लता दीदी भारत की आन, बान और शान हैं।
🔸 (3) खंड – अनुवाद
उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया,
और भारत रत्न की उपाधि से विभूषित किया गया।
उनकी अमूल्य आवाज़ पूरी दुनिया में गूँजी,
और वे समस्त विश्व के हृदय में बस गईं।
तेरह वर्ष की आयु में उन्होंने पहला गीत गाया।
उन्हें पहले पद्मभूषण का सम्मान प्राप्त हुआ,
और उन्होंने भक्ति-भाव से पदों का गायन किया।
जिन पर पूरे हिंदुस्तान को गर्व है।
लता दीदी भारत की आन, बान और शान हैं।
🔸 (4) खंड – अनुवाद
छह फरवरी का दिन बहुत दुःखद बन गया,
कोयल के बिना हमारी बगिया सूनी हो गई।
लता जी की याद में पूरी दुनिया रो पड़ी,
और वे ब्रह्मलीन होकर स्वर्ग सिधार गईं।
राजेश मुरली कहते हैं— लता जी अमर हो गईं,
और आज पूरा विश्व उनकी गाथा का गुणगान करता है।
जिन पर पूरे हिंदुस्तान को गर्व है।
लता दीदी भारत की आन, बान और शान हैं।
2️⃣ विस्तृत भावार्थ – मुखड़े का भावार्थ
कवि लता मंगेशकर जी को भारत की राष्ट्रीय गौरव मानते हैं। वे केवल एक गायिका नहीं, बल्कि नारी सम्मान, संस्कृति और भारतीय अस्मिता का प्रतीक हैं।
(1) खंड का भावार्थ
इस भाग में कवि लता जी के जन्म, परिवार और प्रारंभिक जीवन का वर्णन करता है।
इंदौर की बेटी होकर विश्व मंच तक पहुँचना उनके संघर्ष और साधना का प्रमाण है।
पाँच वर्ष की उम्र में संगीत सीखना यह दर्शाता है कि उनका जीवन बचपन से ही संगीत को समर्पित था।
(2) खंड का भावार्थ
यह खंड लता जी की असाधारण प्रतिभा को उजागर करता है।
36 भाषाओं में गायन यह सिद्ध करता है कि उनका स्वर किसी भाषा या देश तक सीमित नहीं था।
“कोकिला” की उपाधि उनके स्वर की मधुरता और शुद्धता का प्रतीक है।
(3) खंड का भावार्थ
इस भाग में लता जी को मिले सम्मानों और उपलब्धियों का उल्लेख है।
भारत रत्न, पद्मभूषण जैसे पुरस्कार यह प्रमाणित करते हैं कि वे भारत की सांस्कृतिक धरोहर थीं।
भक्ति पदों का गायन यह बताता है कि उनका स्वर आध्यात्मिक भी था।
(4) खंड का भावार्थ
यह कविता का सबसे करुण और भावनात्मक भाग है।
लता जी के देहावसान से संसार को अपूरणीय क्षति हुई।
“कोयल के बिना बगिया सूनी” पंक्ति उनके जाने से संगीत जगत की रिक्तता को दर्शाती है।
कवि अंत में उन्हें अमर घोषित करता है।
🔷 निष्कर्ष
यह कविता—Rajesh Bhai Revaliya
लता मंगेशकर जी का जीवन-चरित्र
भारतीय संगीत की गरिमा
तीनों को निमाड़ी लोकभाषा में सुंदर रूप से प्रस्तुत करती है।
यह रचना श्रद्धांजलि के साथ-साथ सांस्कृतिक दस्तावेज भी है।



