निमाड़ी कलाकार

सुन गौरल – Gangaur geet Lyrics

सुन गौरल – Gangaur geet Lyrics

सुन गौरल - Gangaur geet Lyrics
सुन गौरल – Gangaur geet Lyrics

बाड़-बाड़ पर बड़कूलिये टंगे हुए,
मे रे भंवरिया रे।

बगीची में बसेगा कौन?
बसेंगे-बसेंगे ईसर जी की प्रिया।

सुन गौरल, ये लाओ झोली भर पुष्पों की ले,
आधे बिछाओ इधर-उधर गलियों में, मे रे भंवरिया रे,
आधे गौरां बाई की सेज पर बिछाओ।

पर बिछाकर सो रहे सायब जी,
मुझे कह रहे — “अगड़ घड़वा दूँगा,
अगड़ घड़वाऊँगा मे री बहिनों के।”

सुन गौरल, ये तुम्हारे नवसर हार,
इतना कहते ही रूठ गई।

बड़े बीरोसा निकले,
सुन गौरल — दौड़ी हुई पीहर जा रही।

छोटा देवर मनाने निकला,
सुन गौरल — “ये भावज, वापस आ।”

“तुम्हारी मनायी नहीं आऊँगी,
मे रे देवर रे, तुम्हारे बड़े बीरोसा को भेज।”

बड़े बीरोसा निकले,
सुन गौरल — कंधे पर रखी रे बंदूक।

कच्ची तोड़ी टहनी,
सुन गौरल — सड़ा-सड़ मार पड़ी पीठ पर।

“कभी नहीं रूठूँगी,
सुनो सायब जी, कभी नहीं जाऊँगी मे रे पीहर।”

सायब जी बोले —
“अवश्य रूठो,
सुन गौरल — अवश्य जावो तुम्हारे पीहर।”


Sun Gaural – Gangaur Geet Lyrics

सुन गौरल - Gangaur geet Lyrics
सुन गौरल – Gangaur geet Lyrics

Baad-baad par badkuliye tange hue,
Me re bhanwariya re.

Bagichi mein basega kaun?
Basenge-basenge Isar ji ki priya.

Sun Gaural, ye lao jholi bhar pushpon ki le,
Aadhe bichhao idhar-udhar galiyon mein, me re bhanwariya re,
Aadhe Gauran bai ki sej par bichhao.

Par bichhakar so rahe Saayab ji,
Mujhe keh rahe — “Agad ghadwa dunga,
Agad ghadwaunga me ri bahinon ke.”

Sun Gaural, ye tumhare navsar haar,
Itna kehte hi rooth gayi.

Bade Birosa nikle,
Sun Gaural — daudi hui pihar ja rahi.

Chhota devar manane nikla,
Sun Gaural — “Ye bhaavj, wapas aa.”

“Tumhari manayi nahin aaungi,
Me re devar re, tumhare bade Birosa ko bhej.”

Bade Birosa nikle,
Sun Gaural — kandhe par rakhi re bandook.

Kachchi todi tahni,
Sun Gaural — sada-sad maar padi peeth par.

“Kabhi nahin roothungi,
Suno Saayab ji, kabhi nahin jaungi me re pihar.”

Saayab ji bole —
“Avashya rootho,
Sun Gaural — avashya javo tumhare pihar.”


सुन गौरल - Gangaur geet Lyrics

यह गणगौर का लोकगीत पति-पत्नी के प्रेम, रूठने-मनाने और ग्रामीण जीवन की सरल भावनाओं को दर्शाता है। इसमें गौरा (पत्नी) और सायब/बीरोसा (पति) के बीच का संवाद है। यह गीत खासतौर पर Gangaur पर्व पर गाया जाता है, जो Goddess Parvati और Lord Shiva के दांपत्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। नीचे इस गीत का सरल हिंदी में अर्थ/व्याख्या दी गई है।


गीत का अर्थ 

सुन गौरल - Gangaur geet Lyrics

1. बाड़-बाड़ पर बड़कूलिये टंगे हुए, मे रे भंवरिया रे…
बगीची में बसेगा कौन? बसेंगे ईसर जी की प्रिया।

इस पंक्ति में गांव का सुंदर दृश्य बताया गया है। घरों और बाड़ों पर मिट्टी के बर्तन (बड़कूलिये) टंगे हुए हैं। बगीचे में भगवान ईसर (शिव) और उनकी प्रिया गौरा (पार्वती) का निवास होने वाला है। यह वातावरण गणगौर पर्व की पवित्रता और खुशी को दर्शाता है।


2. सुन गौरल, झोली भर फूल ले आओ।
आधे गलियों में बिछाओ और आधे गौरां बाई की सेज पर।

यहां कहा जा रहा है कि फूलों से पूरे गांव और गौरा माता की सेज सजाई जाए। यह देवी के स्वागत और सम्मान का प्रतीक है।


3. सायब जी सेज पर सो रहे हैं और कहते हैं कि मैं तुम्हारे लिए ‘अगड़’ (आभूषण) बनवाऊंगा और अपनी बहनों के लिए भी बनवाऊंगा।

इस भाग में पति अपनी पत्नी से प्रेमपूर्वक बात करते हुए उसे गहने बनवाने का वादा करता है।


4. जब सायब जी बहनों के लिए भी गहने बनवाने की बात कहते हैं, तो गौरल (पत्नी) नाराज़ होकर रूठ जाती है।

यहां पत्नी को लगता है कि पति उसके बजाय अपनी बहनों को अधिक महत्व दे रहे हैं, इसलिए वह नाराज़ हो जाती है।


5. वह रूठकर अपने मायके (पीहर) जाने लगती है।
छोटा देवर उसे मनाने के लिए आता है और वापस आने को कहता है।

यह दृश्य ग्रामीण परिवार के रिश्तों की मिठास दिखाता है, जहां देवर-भावज का स्नेहपूर्ण संबंध होता है।


6. गौरल कहती है कि मैं तुम्हारे कहने से नहीं आऊंगी, तुम अपने बड़े भाई (बीरोसा) को भेजो।

पत्नी चाहती है कि पति स्वयं आकर उसे मनाए।


7. बड़ा बीरोसा (पति) कंधे पर बंदूक लेकर आता है और रास्ते में टहनी तोड़कर हल्के-फुल्के गुस्से में उसे डांटता है।

यह वास्तव में मारपीट नहीं बल्कि लोकगीत की शैली में पति का नटखट और अधिकारपूर्ण व्यवहार दिखाया गया है।


8. तब गौरल कहती है कि अब मैं कभी रूठूंगी नहीं और पीहर भी नहीं जाऊंगी।

यहां पत्नी पति के प्रेम और अधिकार को समझकर मान जाती है।


9. अंत में सायब जी कहते हैं कि अगर रूठना हो तो रूठ जाओ और पीहर भी जाओ।

यह संवाद पति के स्नेह और विश्वास को दिखाता है कि उनका संबंध इतना मजबूत है कि छोटी-मोटी नाराज़गी से भी प्रेम कम नहीं होगा।


सार:
यह लोकगीत दांपत्य जीवन के प्यार, नोकझोंक, रूठने-मनाने और पारिवारिक रिश्तों की मिठास को दर्शाता है। Gangaur के दौरान महिलाएं इसे गाकर Goddess Parvati और Lord Shiva जैसे आदर्श दंपत्ति के प्रेम को याद करती हैं।

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