थारा दर्शन क जगदम्बा मांय पावागढ़ आंवांगा – निमाड़ी गरबा गीत | Uddhav Bhai Yadav | Nimadi Garba

उद्धव भाई यादव द्वारा रचित निमाड़ी गरबा गीत “थारा दर्शन क जगदम्बा मांय पावागढ़ आंवांगा” माँ अम्बा की भक्ति, शक्ति, प्रेम और दर्शन के भावों से भरा गरबा गीत है। यहाँ पढ़ें पूरी निमाड़ी Lyrics और अर्थ।
🎵 Lyrics – थारा दर्शन क जगदम्बा मांय – Nimadi Garba Geet
लेखक: उद्धव भाई यादव गायक: गीतेश कुमार भार्गव
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थारा दर्शन क जगदम्बा मांय पावागढ़ आंवांगा
थारी ज्योत सी लगय न, ज्योत हम भी घर लांवांगा।
चली रया पैदल पाय,
न म पड़ी गया छाला मां।
तन–मन यो जीवन,
सब कुछ छे थारा हवाला मां।
ज्योत रूप म अम्बा मां, पावणी लावांगा।
गुंजी रयो सब संसार
थारा जयकारा सी भाँ।
माफी करजो गर गलती
जो हुई जाय हमारा सी मां।
थारा ममता का आचल म
शिश हम झुकावांगा।
थारा दर्शन क…
आई गई भवानी,
बंधी न प्रेम की ज़ंजीर म।
जगमग–जगमग ज्योति जली रही
मंदिर म।
लिख उधव कर गुणगान,
गीत थारा गांवांगा।
ENGLISH LYRICS
Thaara darshan ka Jagdamba maay, Pavagadh aanvaanga
Thaari jyot si lagay na, jyot hum bhi ghar laanvaanga.
Chali raya paidal paay,
Na me padi gaya chhaala maay.
Tan–man yo jeevan,
Sab kuch chhe thaara hawaala maay.
Jyot roop me Amba maay, paavni laavaanga.
Goonji rayo sab sansaar,
Thaara jaikaara si bhaan.
Maafi karjo gar galti,
Jo hui jaay hamaara si maay.
Thaara mamta ka aanchal me,
Shish hum jhukaavaanga.
Thaara darshan ka…
Aai gayi Bhawani,
Bandhi na prem ki zanjeer me.
Jagmag–jagmag jyoti jali rahi,
Mandir me.
Likh Udhav kar gun-gaan,
Geet thaara gaavaanga.
गीत का अर्थ
यह निमाड़ी गरबा गीत माँ अम्बा के दर्शन की लालसा, भक्ति, त्याग और प्रेम को अत्यंत सुंदर रूप से प्रस्तुत करता है।
हर पंक्ति में भक्त का भाव, भक्ति की तपस्या और माँ की कृपा का अनुभव दिखाई देता है।
1️⃣ “थारा दर्शन क जगदम्बा मांय पावागढ़ आंवांगा”
भक्त कहता है कि—
हे जगदम्बा, मैं तुम्हारे दर्शन करने पावागढ़ आने वाला हूँ।
यह यात्रा मन की आस्था और प्रेम से भरी है।
यह पंक्ति भक्त की अनन्य भक्ति और संकल्प को दर्शाती है।
2️⃣ “थारी ज्योत सी लगय न, ज्योत हम भी घर लांवांगा”
माँ की ज्योति देखकर मन आलोकित हो जाता है।
भक्त कहता है कि वह यह दिव्य प्रकाश अपने घर भी लेकर जाएगा—
जिससे
घर में सुख
शांति
पवित्रता
और माँ का आशीर्वाद
स्थायी रूप से बना रहे।
3️⃣ “चली रया पैदल पाय, न म पड़ी गया छाला मां”
भक्त की पैदल यात्रा का वर्णन—
पैरों में छाले पड़ गए,
शरीर थक गया,
पर मन नहीं थका।
भक्त का संदेश है:
सच्ची भक्ति में कष्ट भी मधुर लगते हैं।
4️⃣ “तन मन यो जीवन सब कुछ छे थारा हवाला मां”
सबकुछ माँ को समर्पित कर दिया है—
शरीर
मन
जीवन
यह पूर्ण समर्पण का प्रतीक है।
भक्त कहता है कि माँ ही इस जीवन की स्वामिनी हैं।
5️⃣ “ज्योत रूप म अम्बा मां, पावणी लावांगा”
यहाँ भक्त माँ की ज्योति को
घर, समाज और अपने पूरे जीवन में
पुनीत रूप से स्थापित करने की इच्छा रखता है।
6️⃣ “गुंजी रयो सब संसार थारा जयकारा सी भाँ”
माँ की महिमा इतनी विशाल है कि
सारा संसार उनके जयकारों से गूंज रहा है—
यही भक्त का हृदय-गान है।
7️⃣ “माफी करजो गर गलती जो हुई जाय हमारा सी मां”
भक्त माँ से क्षमा माँगता है—
मानव जीवन में गलतियाँ होना स्वभाविक है,
पर
माँ की ममता त्रुटियों को क्षमा करती है।
8️⃣ “थारा ममता का आचल म शिश हम झुकावांगा”
भक्त माँ के चरणों में अपने आपको झुकाता है।
माँ का आँचल
सुरक्षा
प्यार
सांत्वना
आशीर्वाद
का प्रतीक है।
9️⃣ अंतिम भाव – प्रेम और उजाला
“आई गई भवानी, बंधी न प्रेम की ज़ंजीर म”
जब माँ आती हैं,
भक्त और देवी एक सुंदर प्रेमबंधन में बंध जाते हैं।
“जगमग–जगमग ज्योति जली रही मंदिर म”
यह दृश्य माँ की उपस्थिति और शक्ति का प्रतीक है।
“लिख उधव कर गुणगान, गीत थारा गांवांगा”
कवि स्वयं माँ की महिमा गाते हुए अपनी भक्ति व्यक्त करता है।
यह पंक्ति गीत को दिव्यता के उच्चतम बिंदु तक ले जाती है।
पूरे गीत का सार (Essence)
यह गीत निमाड़ी संस्कृति का एक सुंदर गरबा है
जिसमें—
माँ अम्बा के प्रति समर्पण
दर्शन की व्याकुलता
त्याग और तपस्या
प्रेम
क्षमा
ज्योति और शांति
सब एक साथ समाहित हैं।
यह भक्त और माँ के बीच
प्रेम, विश्वास और आस्था का अद्भुत चित्रण है।


