वारे वारे मयदा को जायो ,भिलट देव बाबा जी – निमाड़ी लोकगीत भजन Lyrics
गायक – गीतेश कुमार भार्गव लेखक – श्री सुमेरसिंह जी राव
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Intro
देव भिलट देव बाबा जी निमाड़ की लोक-आस्था के प्रमुख देवताओं में से माने जाते हैं। उनके चमत्कारों, न्याय, शौर्य और भक्तों की रक्षा करने वाली कथाएँ निमाड़ी लोकगीतों और भजनों में गहराई से मिलती हैं।
प्रस्तुत गीत—हालाँकि कई क्षेत्रों में “मयदा/इल्म/घाणी” की लोककथा के रूप में गाया जाता है—लेकिन कई गाँवों में इसे भिलाट देव बाबा जी की शक्ति, उनके चमत्कार और ‘अन्याय से रक्षा’ के लोककथात्मक प्रतीक मानकर भी प्रस्तुत किया जाता है |
वारे वारे मयदा को जायो , भिलट देव बाबा जी – निमाड़ी लोकगीत भजन Lyrics
वारे वारे मयदा को जायो
वारे वारे मयदा को जायो
नाव करी आयो, नाव करी आयो ,काहूर देश विराणा म
तुन खोब फसाडी लाठ इलम का चलता धाणा म
“कोठी काहुर म जाई न – धरी दियो मुकाम
आपस म कयण लग्या- कुछ करा इलम को काम
उनी बदमाश जादुगरणी सी- टक्कर हुई मुद्दाम
चलती घाणी म ओ कि -फिरती लाठ करी दी जाम”
वारे-वारे भाई दो सूरा – विद्या म पुरा
लाल आय बढ्या सीराणा म…तुन खोब फसाडी लाठ इलम का चलता धाणा म
“म्हारा भाई क तु न रोकी लियो
भारी मन की धकाई हुड़दगी रे
वक धुरय लियो घाणा म ऊपर सी धरी दियो दग्गड़ जंगी रे
इना कारण राजा का दखार म –
थारी देह के मुरंगी कराड़ी न
भरी सभा म राजा की कन्या सी लगीण लगाडी न”
बारे-वारे गीत बाबुलाल-लिख टकसाल- 2,
लगी गा पुण्य कमांणा म
तुन खोब फसाडी लाठ इलम का चलता धाणा म
Waare waare mayda ko jaayo
Waare waare mayda ko jaayo,
Naav kari aayo, naav kari aayo, Kaahur desh viraana ma.
Tun khob fasaadi laath ilam ka, chalta dhaana ma.
“Kothi Kaahur ma jaai na, dhari diyo mukaam,
Aapas ma kayan lagya – kuch kara ilam ko kaam.
Uni badmaash jaadugarni si, takkar hui muddaam,
Chalti ghaani ma o ki, phirti laath kari di jaam.”
Waare-waare bhai do soora, vidya ma poora,
Laal aay badhya seeraana ma…
Tun khob fasaadi laath ilam ka, chalta dhaana ma.
“Mhaara bhai ka tu na roki liyo,
Bhaari mann ki dhakaai huddagi re.
Vak dhuray liyo ghaana ma, upar si dhari diyo daggad jangi re.
Ina kaaran raaja ka dakhaar ma –
Thaari deh ke murangi karaadi na.
Bhari sabha ma raaja ki kanya si, lagin lagaadi na.”
Baare-waare geet Babulal, likh Taksal – 2,
Lagi ga punya kamaana ma.
Tun khob fasaadi laath ilam ka, chalta dhaana ma.
गीत का अर्थ और भिलाट देव बाबा जी से संबंध
गीत में “मयदा–इल्म–जादू–लाठ” वाली कहानी एक लोककथा है, जो सदियों से निमाड़ में भिलाट देव बाबा जी के न्याय, सुरक्षा और बुरी शक्ति पर विजय का सांकेतिक रूप माना गया है।
“बदमाश जादुगरणी”, “लाठ”, “घाणी”, “मुकाम” — ये प्रतीक बुरी शक्तियों और चालबाज़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं।
“भाई”, “कन्या”, “राज-सभा” की कथा — न्याय, धर्म और सामाजिक मर्यादा पर आधारित है।
कुछ गाँवों में यह गीत भिलट देव बाबा जी के चमत्कारों की कथा मानकर गाया जाता है, जिसमें बुराई पर देव शक्ति की विजय का वर्णन है।
यह भजन निमाड़ी संस्कृति, ग्रामीण लोककथाओं और देव आस्था का अनोखा मिश्रण है।
गीत का शुद्ध हिन्दी भावार्थ (व्याख्या)
“वारे वारे मयदा को जायो” एक वीर-गाथात्मक निमाड़ी लोकगीत है, जिसमें विद्या, साहस, संघर्ष और अन्याय के विरुद्ध प्रतिरोध की कथा कही गई है। यह गीत लोककथा के रूप में एक ऐसे युवक की कहानी प्रस्तुत करता है, जो ज्ञान (इल्म) की खोज में दूर देश जाता है और वहां कठिन परिस्थितियों का सामना करता है।
परदेश गमन और ज्ञान की खोज
गीत की शुरुआत में नायक नाव द्वारा काहूर देश (परदेश) की यात्रा करता है। यह यात्रा केवल भौतिक नहीं, बल्कि ज्ञान और विद्या प्राप्त करने की यात्रा है। “विराना देश” का उल्लेख यह दर्शाता है कि उसका मार्ग कठिन, अनजान और जोखिमों से भरा हुआ है।
विद्या का संघर्ष और षड्यंत्र
नायक जब काहूर देश में ठहरता है, तो वह विद्या के कार्य में लग जाता है। किंतु वहां उसे दुष्ट और चालाक जादूगरनी जैसी शक्तियों से टकराना पड़ता है। यह टकराव प्रतीक है उन बाधाओं का, जो ज्ञान के मार्ग में ईर्ष्या और कपट के रूप में सामने आती हैं।
“चलती घाणी” और “लाठी” जैसे शब्द संघर्ष, दबाव और षड्यंत्र को दर्शाते हैं।
दो वीर भाइयों का वर्णन
गीत में दो वीर भाइयों की प्रशंसा की गई है, जो विद्या में निपुण और साहस में पूर्ण हैं। यह दर्शाता है कि सच्चा ज्ञान केवल पुस्तकीय नहीं, बल्कि धैर्य, विवेक और आत्मबल से भी जुड़ा होता है। लाल रंग और सीराणा जैसे शब्द वीरता और तेज का प्रतीक हैं।
अन्याय, दमन और राजसभा
अगले हिस्से में नायक के साथ अन्याय होता है। उसे रोका जाता है, उस पर अत्याचार किया जाता है और राजा के दरबार में झूठे आरोप लगाए जाते हैं। यह अंश समाज में सत्ता और न्याय व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर करता है, जहाँ सत्य को दबाने का प्रयास किया जाता है।
राजसभा और सामाजिक कटु सत्य
राजा की भरी सभा में नायक को अपमान और पीड़ा सहनी पड़ती है। यह दृश्य यह दर्शाता है कि जब सत्ता अंधी हो जाती है, तो निर्दोष व्यक्ति को भी दंड भोगना पड़ता है। यहाँ लोकगीत सामाजिक चेतना और नैतिक प्रश्न उठाता है।
✍️ कवि का संदेश
अंत में कवि बाबूलाल अपने गीत को पुण्य का कार्य मानते हैं। यह संकेत है कि लोकगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सत्य, धर्म और न्याय का माध्यम हैं। ऐसे गीत समाज को जागरूक करते हैं और पीढ़ियों तक संदेश पहुँचाते हैं।
निष्कर्ष
“वारे वारे मयदा को जायो” केवल एक लोकगीत नहीं, बल्कि
ज्ञान की खोज,
संघर्ष और साहस,
अन्याय के विरुद्ध आवाज़,
और लोकधर्म की शक्ति
का प्रतीक है।
यह गीत निमाड़ी लोकपरंपरा की उस समृद्ध धरोहर को दर्शाता है, जहाँ कहानी, कविता और संगीत मिलकर जीवन के गहरे सत्य को सरल शब्दों में प्रस्तुत करते हैं।
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