दशा माता की पूजा व्रत कैसे करते है ? 2026

दशा माता व्रत और पूजा 2026 : विधि, नियम, कथा, धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक कारण
भारत में कई ऐसे लोक पर्व हैं जो परिवार की सुख-समृद्धि और जीवन की कठिनाइयों को दूर करने के लिए मनाए जाते हैं। उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण व्रत है दशा माता व्रत। यह व्रत विशेष रूप से राजस्थान, मालवा, निमाड़ और मध्य भारत के कई क्षेत्रों में महिलाओं द्वारा किया जाता है।
इस व्रत को करने से परिवार की दशा (भाग्य, परिस्थिति और ग्रहों की स्थिति) सुधरने की मान्यता है। यही कारण है कि इसे “दशा सुधारने वाला व्रत” भी कहा जाता है।
दशा माता व्रत कब किया जाता है
दशा माता व्रत होली के बाद आने वाली दशमी तिथि को किया जाता है।
साल 2026 में होली के बाद यह व्रत लगभग मार्च के अंत या अप्रैल की शुरुआत में आता है (तिथि पंचांग के अनुसार थोड़ी अलग हो सकती है)।
इस दिन महिलाएं व्रत रखकर दशा माता की पूजा करती हैं और पवित्र धागा बांधती हैं।
दशा माता व्रत का धार्मिक महत्व

हिंदू परंपरा में माना जाता है कि मनुष्य के जीवन में आने वाली सुख-दुख की स्थिति को “दशा” कहा जाता है।
जब जीवन में परेशानियां बढ़ जाती हैं जैसे:
आर्थिक संकट
पारिवारिक कलह
बीमारी
ग्रहों का अशुभ प्रभाव
तो महिलाएं दशा माता का व्रत रखकर भगवान से अपनी स्थिति सुधारने की प्रार्थना करती हैं।
लोक मान्यता के अनुसार:
दशा माता गृहस्थ जीवन की रक्षक देवी हैं
यह व्रत घर की नकारात्मक दशा को सकारात्मक बनाता है
परिवार में सुख-समृद्धि और शांति आती है
दशा माता पूजा की विधि

दशा माता की पूजा बहुत सरल होती है लेकिन इसमें कुछ खास परंपराएं होती हैं।
1. सुबह स्नान और व्रत
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं।
2. पीपल या दीवार पर पूजा स्थान बनाना
दशा माता की पूजा आमतौर पर:
पीपल के पेड़ के नीचे
या घर की दीवार पर चित्र बनाकर
की जाती है।
दीवार पर हल्दी, कुमकुम या गेरू से दशा माता का चित्र बनाया जाता है।
3. पूजा सामग्री
पूजा के लिए निम्न सामग्री रखी जाती है:
रोली और हल्दी
चावल (अक्षत)
जल से भरा लोटा
धूप और दीपक
गुड़
फूल
दस गांठ वाला धागा
4. दशा माता की पूजा
सबसे पहले दीपक जलाकर देवी का ध्यान करें।
फिर क्रम से चढ़ाएं:
रोली
अक्षत
फूल
गुड़ का भोग
5. दस गांठ वाला धागा बांधना

इस व्रत की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है दस गांठ वाला धागा।
महिलाएं धागे में 10 गांठ लगाती हैं
इसे पीपल के पेड़ या घर में बांधा जाता है
कुछ स्थानों पर इसे हाथ में भी बांधा जाता है
यह धागा दस दिशाओं और दस प्रकार की समस्याओं से रक्षा का प्रतीक माना जाता है।
दशा माता व्रत के नियम
दशा माता का व्रत करते समय कुछ नियमों का पालन किया जाता है।
1. व्रत का पालन
इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और पूजा के बाद ही भोजन करती हैं।
2. सादगी
पूजा के दिन घर में सादगी रखी जाती है।
3. झूठ और क्रोध से बचना
व्रत के दिन:
झूठ नहीं बोलना
क्रोध नहीं करना
किसी का अपमान नहीं करना
4. दान करना
गरीबों को दान देना शुभ माना जाता है।
दशा माता व्रत कथा
लोक कथाओं के अनुसार एक समय एक राजा था जिसकी दशा अचानक खराब हो गई।
राज्य में अकाल पड़ गया
धन खत्म हो गया
परिवार में दुख बढ़ने लगे
एक दिन एक साधु ने रानी को दशा माता का व्रत करने की सलाह दी।
रानी ने पूरी श्रद्धा से:
व्रत रखा
दशा माता की पूजा की
दस गांठ का धागा बांधा
कुछ समय बाद राजा की स्थिति बदलने लगी।
राज्य में खुशहाली लौट आई
धन और समृद्धि बढ़ने लगी
परिवार में सुख शांति आ गई
तब से यह माना जाता है कि दशा माता का व्रत जीवन की खराब दशा को सुधार देता है।
दशा माता व्रत के पीछे वैज्ञानिक कारण
लोक पर्वों के पीछे कई बार सामाजिक और वैज्ञानिक कारण भी होते हैं।
1. पीपल के पेड़ का महत्व
पीपल के पेड़ की पूजा की जाती है क्योंकि:
यह 24 घंटे ऑक्सीजन देने वाला पेड़ माना जाता है
इसके आसपास वातावरण शुद्ध रहता है
इससे लोगों का प्रकृति से जुड़ाव बढ़ता है।
2. मानसिक शांति
व्रत और पूजा से:
मन शांत होता है
सकारात्मक सोच बढ़ती है
तनाव कम होता है
3. सामाजिक एकता
इस त्योहार में महिलाएं एक साथ पूजा करती हैं।
इससे:
समाज में मेल-जोल बढ़ता है
सांस्कृतिक परंपराएं जीवित रहती हैं
दशा माता व्रत का सांस्कृतिक महत्व
मालवा, निमाड़ और राजस्थान में दशा माता का व्रत सिर्फ धार्मिक नहीं बल्कि लोक संस्कृति का हिस्सा है।
इस दिन:
महिलाएं पारंपरिक गीत गाती हैं
समूह में पूजा करती हैं
लोक परंपराएं निभाती हैं
यह त्योहार परिवार और समाज को जोड़ने वाला पर्व माना जाता है।
निष्कर्ष
दशा माता व्रत भारतीय लोक संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह व्रत केवल धार्मिक आस्था ही नहीं बल्कि सामाजिक एकता, मानसिक शांति और प्रकृति से जुड़ाव का प्रतीक भी है।
श्रद्धा और नियमों के साथ किया गया दशा माता व्रत जीवन में सकारात्मकता और सुख-समृद्धि लाने वाला माना जाता है।



