गणगौर पूजा कैसे करते है ? 2026 तिथि , मुहूर्त और पूजा विधि

गणगौर पूजा 2026: सही तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
भारत के प्रमुख लोक पर्वों में से एक Gangaur Festival महिलाओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, मालवा और निमाड़ क्षेत्र में बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है।
गणगौर माता वास्तव में माता पार्वती (गौरी) का स्वरूप हैं और “ईसर” भगवान शिव को कहा जाता है। इस दिन विवाहित महिलाएँ अपने पति की लंबी आयु और कुंवारी लड़कियाँ अच्छे वर की कामना के लिए व्रत और पूजा करती हैं।
यह पर्व होलिका दहन के बाद शुरू होकर लगभग 18 दिनों तक चलता है और अंतिम दिन गणगौर की पूजा व विसर्जन किया जाता है।
2026 में गणगौर कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार गणगौर १९ मार्च २०२६ से शुरू हो रही है १९ मार्च से ही हिन्दू चैत्र नवरात्रे शुरू हो रहे है ,हिंदू पंचांग के अनुसार गणगौर का मुख्य पर्व चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है।
📅 गणगौर 2026 तिथि
दिन: शनिवार, 21 मार्च 2026
तिथि: चैत्र शुक्ल तृतीया
यह दिन गणगौर माता और भगवान शिव की पूजा के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
गणगौर 2026 तिथि और समय (पंचांग अनुसार)
पंचांग के अनुसार 2026 में तृतीया तिथि का समय इस प्रकार है:
तृतीया तिथि प्रारंभ: 21 मार्च 2026, सुबह 02:30 बज
तृतीया तिथि समाप्त: 21 मार्च 2026, रात 11:56 बजे
उदय तिथि के आधार पर 21 मार्च 2026 को ही गणगौर का मुख्य पर्व मनाया जाएगा।
गणगौर पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार गणगौर पूजा के लिए सुबह का समय सबसे शुभ माना जाता है।
संभावित शुभ मुहूर्त (भारत समय अनुसार):
🌅 सुबह पूजा मुहूर्त:
06:18 AM – 08:42 AM☀️ अभिजीत मुहूर्त (यदि सुबह पूजा संभव न हो):
लगभग 12:00 PM – 12:50 PM
यह समय माता गौरी की पूजा, व्रत और आरती के लिए शुभ माना जाता है।
2026 में गणगौर व्रत कब से शुरू होगा?
गणगौर का व्रत होलिका दहन के अगले दिन से शुरू होता है और लगभग 18 दिनों तक चलता है।
📅 गणगौर व्रत अवधि 2026
व्रत आरंभ: 4 मार्च 2026
मुख्य गणगौर पूजा: 21 मार्च 2026
इन दिनों महिलाएँ रोज सुबह ईसर-गौर की पूजा और गीत गाती हैं।
गणगौर पूजा का धार्मिक महत्व

गणगौर माता की पूजा करने से:
अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है
वैवाहिक जीवन सुखी रहता है
अच्छे वर की प्राप्ति होती है
घर में सुख-समृद्धि आती है
धार्मिक मान्यता के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तप किया था। इसलिए महिलाएँ इस दिन गौरी माता की पूजा करके दांपत्य सुख की कामना करती हैं।
गणगौर पूजा की परंपरा (मालवा, निमाड़ और राजस्थान)

मध्यप्रदेश और राजस्थान में गणगौर पूजा की कुछ विशेष परंपराएँ हैं:
घर में मिट्टी की ईसर-गौर मूर्तियाँ स्थापित की जाती हैं
महिलाएँ गणगौर गीत गाती हैं
कुँवारी लड़कियाँ व्रत रखती हैं
अंतिम दिन गणगौर माता की शोभायात्रा या रथ निकाला जाता है
विशेष रूप से राजस्थान के जयपुर, उदयपुर और मध्यप्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में गणगौर का पर्व बहुत प्रसिद्ध है।
गणगौर पूजा की संक्षिप्त विधि
पूजा विधि इस प्रकार होती है:
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें
ईसर-गौर की मूर्ति स्थापित करें
माता को सिंदूर, चूड़ी, मेहंदी अर्पित करें
फूल, मिठाई और फल का भोग लगाएं
गणगौर माता की आरती करें
गणगौर गीत गाएं
अंत में महिलाएँ माता से परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करती हैं।
निष्कर्ष
2026 में गणगौर का पर्व 21 मार्च 2026 (शनिवार) को मनाया जाएगा। इस दिन चैत्र शुक्ल तृतीया की तिथि रहेगी और सुबह का समय पूजा के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
गणगौर पर्व लगभग 18 दिनों तक चलने वाला उत्सव है, जो होली के बाद शुरू होकर माता पार्वती और भगवान शिव की आराधना के साथ समाप्त होता है। यह पर्व विशेष रूप से राजस्थान, मालवा और निमाड़ क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान माना जाता है।



