गणगौर माता की मूर्तियाँ और रथ कहाँ मिलते हैं ? 2026

भारत में मनाए जाने वाले प्रमुख लोक पर्वों में Gangaur Festival का विशेष स्थान है। यह पर्व मुख्य रूप से राजस्थान, मालवा और निमाड़ क्षेत्र में बड़े उत्साह से मनाया जाता है। इस दिन महिलाएँ ईसर-गौर (भगवान शिव और माता पार्वती) की पूजा करती हैं और उनकी सुंदर मूर्तियों को सजाकर घर या मंदिर में स्थापित करती हैं।
गणगौर के समय कई स्थानों पर गणगौर का रथ, झांकी और शोभायात्रा भी निकाली जाती है। इसलिए इस पर्व से पहले लोग बड़ी संख्या में गणगौर माता की मूर्तियाँ और रथ खरीदते हैं।
यदि आप निमाड़, इंदौर या राजस्थान में गणगौर की मूर्ति खरीदना चाहते हैं, तो नीचे दिए गए स्थान सबसे प्रसिद्ध माने जाते हैं।
1. निमाड़ क्षेत्र में गणगौर माता की मूर्तियाँ कहाँ मिलती हैं

मध्यप्रदेश का निमाड़ क्षेत्र (खरगोन, खंडवा, बड़वानी आदि) गणगौर परंपरा के लिए बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ कई गाँवों और कस्बों में स्थानीय कुम्हार और कारीगर मिट्टी और लकड़ी की गणगौर मूर्तियाँ बनाते हैं।
मुख्य स्थान:
खरगोन
Khargone जिले में गणगौर का पर्व बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ के बाजारों में गणगौर के समय विशेष रूप से मिट्टी की पारंपरिक मूर्तियाँ मिलती हैं।
खंडवा
Khandwa शहर के पुराने बाजारों में कई कारीगर गणगौर की मूर्तियाँ और पूजा सामग्री बेचते हैं।
बड़वानी
Barwani जिले में ग्रामीण कारीगर पारंपरिक शैली में मिट्टी की मूर्तियाँ बनाते हैं जिन्हें स्थानीय लोग खरीदते हैं।
सेंधवा और मंडलेश्वर
इन क्षेत्रों में भी गणगौर के समय अस्थायी बाजार लगते हैं जहाँ गणगौर की मूर्तियाँ, रथ और सजावट सामग्री मिलती है।
2. इंदौर में गणगौर माता की मूर्तियाँ कहाँ मिलती हैं

मध्यप्रदेश का प्रमुख शहर Indore मालवा क्षेत्र का सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ गणगौर पर्व के समय कई बाजारों में मूर्तियाँ उपलब्ध होती हैं।
मालगंज और राजवाड़ा क्षेत्र
Rajwada Palace के आसपास के बाजारों में गणगौर की मूर्तियाँ और पूजा सामग्री आसानी से मिल जाती हैं।
खजराना और मारवाड़ी बाजार
Khajrana Ganesh Temple के आसपास के धार्मिक बाजारों में भी त्योहारों के समय गणगौर की मूर्तियाँ मिलती हैं।
सराफा बाजार
Sarafa Bazaar के आसपास के क्षेत्रों में भी कई दुकानों पर धार्मिक मूर्तियाँ और सजावटी सामग्री मिलती है।
इंदौर में अक्सर राजस्थानी शैली की लकड़ी की गणगौर मूर्तियाँ भी उपलब्ध रहती हैं क्योंकि यहाँ बड़ी संख्या में मारवाड़ी समुदाय रहता है।
3. राजस्थान में गणगौर माता की मूर्तियाँ कहाँ मिलती हैं
राजस्थान गणगौर पर्व का मुख्य केंद्र है। यहाँ के कई शहरों में कारीगर पीढ़ियों से गणगौर की मूर्तियाँ बना रहे हैं।
जयपुर
Jaipur में गणगौर की मूर्तियाँ बनाने वाले कई कारीगर हैं। यहाँ की लकड़ी की रंगीन इसर-गौर मूर्तियाँ पूरे भारत में प्रसिद्ध हैं।
मुख्य बाजार:
त्रिपोलिया बाजार
बापू बाजार
चौड़ा रास्ता
उदयपुर
Udaipur में गणगौर की शोभायात्रा बहुत प्रसिद्ध है। यहाँ के हस्तशिल्प बाजारों में सुंदर मूर्तियाँ मिलती हैं।
जोधपुर
Jodhpur में भी पारंपरिक कारीगर गणगौर की लकड़ी और धातु की मूर्तियाँ बनाते हैं।
बीकानेर और चित्तौड़गढ़
Bikaner और Chittorgarh में भी कई कारीगर पारंपरिक गणगौर मूर्तियाँ तैयार करते हैं।
4. गणगौर का रथ कहाँ बनता है
गणगौर पर्व के दौरान कई शहरों में गणगौर का रथ या झांकी तैयार की जाती है। यह रथ अक्सर:
स्थानीय बढ़ई (कारपेंटर)
मंदिर समितियाँ
धार्मिक मंडल
द्वारा बनाया जाता है।
राजस्थान और मालवा क्षेत्र में कई कारीगर लकड़ी के सुंदर गणगौर रथ बनाते हैं जिन्हें शोभायात्रा में उपयोग किया जाता है।
निष्कर्ष
गणगौर माता की मूर्तियाँ और रथ निमाड़, इंदौर और राजस्थान के कई शहरों और बाजारों में आसानी से मिल जाते हैं।
मुख्य स्थान इस प्रकार हैं:
निमाड़ क्षेत्र
खरगोन
खंडवा
बड़वानी
सेंधवा
इंदौर
राजवाड़ा बाजार
खजराना क्षेत्र
सराफा बाजार
राजस्थान
जयपुर
उदयपुर
जोधपुर
बीकानेर
इन स्थानों पर आपको मिट्टी, लकड़ी, धातु और संगमरमर से बनी विभिन्न प्रकार की गणगौर मूर्तियाँ मिल सकती हैं।



